Sharjah में हुआ बड़ा हादसा, केरल की 32 साल की महिला डॉक्टर की अचानक मौत

यूएई के Sharjah से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां रहने वाली एक भारतीय महिला डॉक्टर की अचानक मौत हो गई। मृतका की पहचान 32 वर्षीय डॉ. आफीना रहीम के रूप में हुई है, जो मूल रूप से भारत के केरल राज्य के मलप्पुरम जिले की रहने वाली थीं। वह पिछले चार वर्षों से अपने परिवार के साथ यूएई में रह रही थीं और इस घटना से पूरे प्रवासी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।
अचानक घर में हुआ हादसा
घटना 16 सितंबर 2026 की है जब डॉ. आफीना अपने घर पर थीं। उस समय उनके पति, जो पेशे से एक शिक्षक हैं, अपने काम पर गए हुए थे। घर पर उनके दो छोटे बच्चे भी थे, जिनकी उम्र करीब साढ़े तीन साल और डेढ़ साल है। परिवार के एक रिश्तेदार ने उन्हें घर पर अचेत अवस्था में पाया। परिवार के सदस्यों ने तुरंत उन्हें बचाने के लिए सीपीआर देने की कोशिश की और तुरंत एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचाया नहीं जा सका और उनकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार
घटना के समय तक मौत का सटीक मेडिकल कारण सार्वजनिक नहीं किया गया था। परिवार के लोगों का कहना है कि वह पूरी तरह स्वस्थ थीं और उन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। चूंकि यह मौत अस्पताल के बाहर हुई है, इसलिए यूएई के नियमों के अनुसार फॉरेसिंक और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मौत के पुख्ता कारणों का पता आधिकारिक दस्तावेजों और फॉरेसिंक रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
भारतीय समतावास दे रहा है पूरी मदद
दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास (Consulate General of India in Dubai) इस पूरे मामले में नजर बनाए हुए है और परिवार को हरसंभव कांसुलर सहायता प्रदान कर रहा है। यूएई में रहने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को आपातकालीन स्थिति में दूतावास से संपर्क करने के लिए 24/7 हेल्पलाइन नंबर +971 50 734 7676 दिया गया है या वे [email protected] पर ईमेल भी कर सकते हैं। पार्थिव शरीर को भारत यानी केरल वापस भेजने के लिए यूएई का मृत्यु प्रमाण पत्र, डेथ नोटिफिकेशन, पुलिस और फॉरेसिंक रिपोर्ट, मृतका का पासपोर्ट, वीजा या एमिरेट्स आईडी और स्पॉन्सर या नियोक्ता का पत्र जरूरी होता है।
नियोक्ता की जिम्मेदारी और जरूरी सलाह
यूएई श्रम कानून के अनुच्छेद 15(3) के अनुसार, कुछ खास रोजगार से जुड़ी परिस्थितियों में नियोक्ता पार्थिव शरीर को तैयार करने और उसे वापस भेजने का खर्च उठाने के जिम्मेदार हो सकते हैं। भारतीय समतावास ने परिवारों को सलाह दी है कि वे पार्थिव शरीर को स्वदेश भेजने के लिए किसी भी अनाधिकृत एजेंट के चक्कर में न पड़ें। सभी शुल्कों और प्रक्रियाओं की पुष्टि केवल आधिकारिक चैनलों या भारतीय सामुदायिक संगठनों के माध्यम से ही करने की बात कही गई है।