सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के हमले में गोरखपुर का भारतीय ड्राइवर कमलेश पांडे मारा गया
सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के हमले में गोरखपुर के कमलेश पांडे की मौत हो गई। भारतीय दूतावास शव वापस लाने में जुटा है।

दम्माम: सऊदी अरब के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के मिसाइल या ड्रोन हमले में भारत के एक नागरिक की मौत हो गई है। मरने वाले की पहचान 36 वर्षीय कमलेश पांडे के रूप में हुई है, जो एयरपोर्ट पर बस ड्राइवर और ग्राउंड स्टाफ के तौर पर काम करते थे।
कमलेश पांडे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बांसगांव स्थित किशुनपुर गांव के रहने वाले थे। वह पिछले तीन-चार साल से एयरपोर्ट पर कार्यरत थे और अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी सुनीता और 10 व 14 साल की दो बेटियां हैं। वह हरीश चंद्र पांडे के बेटे थे।
रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने कमलेश की मौत की पुष्टि कर दी है। दूतावास अब उनके परिवार और बांसगांव पुलिस के साथ मिलकर शव को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में जुटा है। इस हमले में एक अन्य कर्मचारी सुल्तान अल-काहतानी की भी मौत हुई, जिनकी धुंआ अंदर जाने की वजह से जान गई।
दम्माम की इस घटना में कुल आठ लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो भारतीय, दो यमनी, दो बांग्लादेशी, एक नेपाली और एक सऊदी नागरिक शामिल हैं। इससे कुछ घंटे पहले शायबा ऑयलफील्ड पर भी ड्रोन हमला हुआ था, जिसे सऊदी एयर डिफेंस ने रोक लिया, लेकिन मलबे की चपेट में आने से एक फिलिपीन और एक नेपाली कर्मचारी की मौत हो गई और एक भारतीय घायल हो गया।
हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने रियाद में सऊदी रक्षा मंत्रालय, यनबू में अरामको साइट और अबहा एयरपोर्ट पर भी हमले किए हैं और आगे और कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। इससे पहले 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में हैदराबाद के आईटी प्रोफेशनल मोहम्मद यूसुफ अली समेत 13 लोग मारे गए थे।
खाड़ी देशों में चल रहे इस संघर्ष में अब तक कम से कम छह भारतीयों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और एक व्यक्ति लापता है। ओमान के पास एमटी पेट्रो डॉल्फिन टैंकर पर ड्रोन हमले के बाद दो भारतीय नाविक लापता बताए जा रहे हैं। जुलाई में युद्धविराम टूटने के बाद से हालात और बिगड़ गए हैं।
सुरक्षा कारणों से एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइनों ने सऊदी शहरों के लिए अपनी उड़ानें बंद कर दी हैं। 28 फरवरी से अब तक 3 लाख से ज्यादा भारतीय वापस भारत लौट चुके हैं। विदेश मंत्रालय ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की है और प्रवासियों की मदद के लिए भारतीय मिशनों में 24 घंटे कंट्रोल रूम चालू रखे हैं।
जीसीसी देशों में रह रहे करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए मिशन बहरीन, कुवैत या कतर के जरिए रास्ते तलाश रहे हैं। इस बीच अमेरिका ने सऊदी अरब से अपने गैर-जरूरी राजनयिक कर्मचारियों को निकालने का आदेश दिया है और अरामको ने भी अपने दहरान मुख्यालय को खाली करा लिया है।