सऊदी अरब पर हouthi मिसाइल हमला, कई भारतीय प्रवासी घायल, नई दिल्ली ने जताई गहरी चिंता.

सऊदी अरब के कई दक्षिणी शहरों पर हाल ही में हुए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों ने वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है। इन हमलों में आम रिहायशी इलाकों के साथ-साथ आर्थिक ठिकानों को भी निशाना बनाया गया, जिसमें अभ्हा का एक सऊदी अरामको साइट भी शामिल है। इन खतरनाक हमलों में कुछ भारतीय नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई है, जिसके बाद से खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों के परिवारों में चिंता का माहौल साफ देखा जा सकता है। भारत सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।
भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और अस्पताल का दौरा
हूती विद्रोहियों की तरफ से खमीस मुशाइत, अभ्हा, ताइफ और जाज़ान जैसे प्रमुख शहरों को लगातार निशाना बनाया गया। जाज़ान की घटनाओं में घायल हुए भारतीय नागरिकों का हाल जानने के लिए जिद्दा स्थित भारतीय महावाणिज्य मंत्री Fahad Ahmed Khan Suri ने गत 14 सितंबर को डॉ. सुलैमान फकीह अस्पताल का दौरा किया था। हालांकि हमलों में घायल हुए लोगों की सटीक संख्या अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तक लगभग 27.48 लाख भारतीय नागरिक अकेले सऊदी अरब में रह रहे हैं, जबकि छह जीसीसी देशों को मिलाकर यह आंकड़ा करीब एक करोड़ तक पहुंच जाता है। ऐसे में वहां रह रहे लोग और उनके परिवार भारत सरकार के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों और दूतावास के संपर्क में बने हुए हैं ताकि लगातार ताजा अपडेट मिल सके।
विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय सुरक्षा
नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के हमले पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। उन्होंने बताया कि इस बढ़ते तनाव से न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, बल्कि बाब-ए-मंडेब जलडमरूमध्य के पास समुद्री नौवहन भी प्रभावित हो रहा है। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ब्रिक्स सम्मेलन के इतर सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से मुलाकात कर चुके हैं और कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत जारी है। इसके अलावा, भारत सरकार के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भी स्थिति का जायजा लेने के लिए हाल ही में दौरा किया था।
प्रवासी मजदूरों के सामने सामाजिक सुरक्षा और अन्य मुश्किलें
खाड़ी देशों में काम करने वाले उम्रदराज कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी हालिया रिपोर्टों में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। डेक्कन हेराल्ड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, गल्फ देशों में मिलने वाली सेवा-समाप्ति ग्रेच्युटी पेंशन की तरह काम नहीं करती है और भारत की सीमा पार करते ही ईपीएफओ कवरेज आमतौर पर समाप्त हो जाती है। इसके अलावा उत्तराखंड के एक ट्रक ड्राइवर Indramani Nautiyal का मामला भी सामने आया है, जो साल 2018 की एक सड़क दुर्घटना के चलते करीब 2.29 करोड़ रुपये के भारी-भरकम कंपनी जुर्माने का सामना कर रहे हैं। इस मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर आधिकारिक रूप से हस्तक्षेप करने की अपील की है।
सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए रियाद और जिद्दा स्थित भारतीय दूतावास के साथ-साथ प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) की मदद लें। दूतावास के अधिकारी लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि हर पीड़ित भारतीय नागरिक तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।