सऊदी अरब में फंसे भारतीय मजदूर, सैलरी रुकी और बिना सूचना रद्द हुए वीजा

सऊदी अरब में भारतीय मजदूरों की सैलरी रुकी और वीजा रद्द हो रहे हैं। रियाद में सुरक्षा अलर्ट के बीच प्रवासियों ने मदद की गुहार लगाई है।

Gautam Sahu8 November 20262 min read0 viewsSaudi
सऊदी अरब में फंसे भारतीय मजदूर, सैलरी रुकी और बिना सूचना रद्द हुए वीजा

रियाद: सऊदी अरब और यूएई में काम कर रहे भारतीय प्रवासी कर्मचारी इस समय भारी वित्तीय संकट और असुरक्षा के दौर से गुजर रहे हैं। बड़ी संख्या में मजदूरों और ड्राइवरों की सैलरी रोक दी गई है और बिना किसी पूर्व सूचना के उनके वीजा रद्द किए जा रहे हैं।

6 और 7 नवंबर 2026 को उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल और राजस्थान के प्रवासियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए रियाद स्थित भारतीय दूतावास से मदद की अपील की। कर्मचारियों का कहना है कि उनसे दिन में 12 से 16 घंटे काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें महीने में केवल 1,000 से 2,500 सऊदी रियाल (करीब 22,000 से 55,000 रुपये) ही दिए जा रहे हैं।

कंपनियों के अचानक बंद होने से कई श्रमिकों का इकामा और वीजा तत्काल रद्द कर दिया गया है, जिससे वे वहां फंस गए हैं और उन्हें निर्वासन (डिपोर्टेशन) का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय दूतावास ने ड्राइवरों के लिए 3,000 रियाल की रेफरल मजदूरी तय की है, लेकिन कर्मचारियों के मुताबिक बाजार में वास्तविक दरें इससे काफी कम हैं।

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नियमों के मुताबिक रोजगार अनुबंधों को मुसानेद पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन कमजोर बताया जा रहा है। जिन श्रमिकों का इकामा एक्सपायर हो चुका है, उन्हें कागजी कार्रवाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और फाइनल एग्जिट की प्रक्रिया में एक महीने से ज्यादा का समय लग रहा है।

दूतावास ने निर्देश दिया है कि मेडिकल इमरजेंसी से जुड़े दस्तावेज [email protected] पर भेजे जाएं।

आर्थिक तंगी के बीच 8 नवंबर 2026 को सुरक्षा संकट भी गहरा गया। सऊदी सिविल डिफेंस ने रियाद और पूर्वी प्रांत में नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म को सक्रिय कर दिया। किंग अब्दुल्ला फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट में एक अरमको टावर को नुकसान पहुंचने की खबरों और तेज धमाकों के बाद निवासियों को खिड़कियों और छतों से दूर रहने और घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई।

भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों से स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा है। हालांकि खतरे के टलने की घोषणा की गई, लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष के कारण सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं। फरवरी से अब तक इस संघर्ष में नाविकों सहित कई भारतीयों की जान जा चुकी है।

भारत में मौजूद परिवारों पर भी दबाव बढ़ा है, क्योंकि बीमा लागत में भारी वृद्धि हुई है। केरल हाईकोर्ट के आदेश के बाद नोर्का (NORKA) बीमा के प्रीमियम में 166 से 233 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

राहत कार्यों के बावजूद प्रभावित श्रमिकों का कहना है कि वेतन न मिलने, वीजा अस्थिरता और सुरक्षा खतरों के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म ही उनकी मदद मांगने का मुख्य जरिया बने हुए हैं।

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