UAE में धमाके के बाद भारतीय प्रवासी की मौत, केरल का रहने कामगार आजा होता 30 साल का

Lov Singh10 August 20264 min read141 viewsUAE
UAE में धमाके के बाद भारतीय प्रवासी की मौत, केरल का रहने कामगार आजा होता 30 साल का

दुबई की शेख ज़ायेद रोड, अल क़ुओज़ इलाका — 3 अगस्त, सोमवार शाम। यहाँ एक कार शोरूम है, "द कार सुपरस्टोर"। शाम का वक़्त था, शोरूम में रोज़ की तरह काम चल रहा था। तभी शोरूम के गेट के पास, जो ऑटो वर्कशॉप से सटा हुआ है, किसी ने आग की लपटें देखीं। कुछ स्टाफ फायर एक्सटिंग्विशर लेकर दौड़े, आग बुझाने की कोशिश में जुट गए। और तभी एक ज़ोरदार धमाका हुआ — पास रखा गैस सिलेंडर फट गया था।

धमाका इतना तेज़ था कि बगल की दुकानों के साइनबोर्ड तक उखड़ गए। दुबई सिविल डिफेंस की गाड़ियाँ मिनटों में पहुँच गईं, एक घंटे के अंदर आग बुझा दी गई, इलाका सील कर दिया गया। लेकिन जो नुकसान होना था, वो हो चुका था।

इस धमाके में जान गंवाने वाले का नाम था शिजिन पॉल। उम्र सिर्फ 27 साल।

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केरल के कोल्लम ज़िले के कोट्टारक्करा के रहने वाले। महज़ आठ महीने पहले ही वो नई ज़िंदगी की उम्मीद लेकर दुबई आए थे, इसी शोरूम में मल्टीमीडिया मार्केटिंग और वीडियोग्राफी का काम कर रहे थे — गाड़ियों की शूटिंग, सोशल मीडिया कंटेंट, यही सब उनका रोज़मर्रा का काम था। धमाके में वो बुरी तरह घायल हुए, अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। उनका एक करीबी रिश्तेदार खबर मिलते ही अस्पताल भागा — मगर तब तक शिजिन जा चुके थे।

एक बात और है जो इस खबर को और भारी बना देती है — शिजिन की शादी को अभी बमुश्किल एक साल हुआ था। पत्नी घर पर उनके लौटने का इंतज़ार कर रही थी। दुबई में उनके साथ रहने वाले एक साथी ने बताया कि उसे यह खबर अकोमोडेशन के व्हाट्सएप ग्रुप में मिली, और यकीन ही नहीं हुआ — कहा, शिजिन बहुत सीधा-सादा, अच्छा इंसान था, अपनी पत्नी से दोबारा मिलने का इंतज़ार कर रहा था। दुबई की मलयाली कम्युनिटी में उनके जाने का ग़म साफ महसूस हो रहा है, सोशल मीडिया पर लोग श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

अब एक बात, जो शुरुआती खबरों में छूट गई थी। इस हादसे में सिर्फ शिजिन नहीं मरे थे।

तीन दिन बाद पता चला कि एक और शख्स की जान गई — न्केंग बोरिस, 30 साल, कैमरून के रहने वाले, यहाँ ऑटो मैकेनिक का काम करते थे, 2019 से यूएई में थे। उनका कोई परिवार यहाँ नहीं था, एक दोस्त ने ही उनकी शिनाख्त की। इससे पहले उनके भाई ने, जो कैमरून में था, एक अखबार को ईमेल करके पूछा था कि उसका भाई कहाँ है — क्योंकि न बोरिस का फोन उठ रहा था, न उसका कोई अता-पता था। यानी हफ्तों तक एक परिवार सिर्फ इस डर में जीता रहा कि कहीं उनका बेटा उसी धमाके में तो नहीं मारा गया।

सोचिए — एक ही धमाका, दो देशों के दो परिवार टूट गए। केरल में एक पत्नी अपने पति का रास्ता देख रही थी, कैमरून में एक भाई अपने भाई की कोई खबर पाने के लिए तड़प रहा था।

शोरूम अब भी बंद है। जिस दिन पत्रकार वहाँ पहुँचे, दीवारों पर धुएं के निशान थे, हवा में जलने की गंध अब भी बाकी थी। शोरूम ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट डालकर बताया कि हादसे की वजह से वो फिलहाल बंद रहेगा। दुबई पुलिस अब भी यह पता लगाने में जुटी है कि धमाका आखिर हुआ कैसे — गवाहों से पूछताछ हो चुकी है, लेकिन नतीजा अभी सामने नहीं आया। दुबई मीडिया ऑफिस ने लोगों से कहा है कि सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें, अफवाहें न फैलाएं।

भारतीय दूतावास ने शिजिन की मौत की पुष्टि कर दी है, परिवार से लगातार संपर्क में है, और पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने की तैयारी में मदद कर रहा है।

इस तरह की खबरें अक्सर एक दिन आती हैं और अगले दिन गुम हो जाती हैं। लेकिन इसके पीछे जो असल तस्वीर है, वो कहीं ज़्यादा बड़ी है। भारत सरकार के ही आँकड़े बताते हैं कि 2023 से 2025 के बीच खाड़ी देशों में हर हफ्ते औसतन तीन भारतीय किसी न किसी कार्यस्थल दुर्घटना में जान गंवा चुके हैं। शिजिन उनमें से एक नाम भर नहीं थे — वो एक ऐसे युवा थे जो बाकी लाखों की तरह बेहतर ज़िंदगी की उम्मीद में घर से दूर गए थे, मेहनत कर रहे थे, त्योहारों पर घर की याद में उदास होते होंगे, और यही सोचते होंगे कि जल्द ही सब ठीक हो जाएगा और वो अपनी पत्नी के पास लौटेंगे।

जांच अभी जारी है। शायद कुछ दिनों में पता चले कि आखिर वो सिलेंडर वहाँ क्यों और कैसे फटा। लेकिन जो बात नहीं बदलेगी, वो यह है कि दो घर, दो अलग-अलग महाद्वीपों में, अब कभी पहले जैसे नहीं रहेंगे।

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