सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट पर हूती हमले में गोरखपुर का भारतीय नागरिक कमलेश पांडे मारा गया
सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट पर हुए हूती हमले में गोरखपुर के कमलेश पांडे की मौत हो गई। कई अन्य भारतीय घायल हुए हैं।

दम्माम: सऊदी अरब के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। मरने वाले की पहचान 36 वर्षीय कमलेश पांडे के रूप में हुई है। कमलेश उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बांसगांव स्थित किशनपुर गांव के रहने वाले थे।
कमलेश पांडे एयरपोर्ट पर पुशबैक ऑपरेटर और बस ड्राइवर के तौर पर काम करते थे। इस काम में उन्हें तीन से पांच साल का अनुभव था और इससे पहले वे बेंगलुरु एयरपोर्ट पर भी कार्यरत रह चुके थे। उनके परिवार में पत्नी सुनीता और दो बेटियां तन्वी (14 वर्ष) और तान्या (10 वर्ष) हैं। वह किसान हरिश चंद्र पांडे के चार बेटों में दूसरे नंबर पर थे।
हवाई उड़ानों में बाधा आने के कारण कमलेश का शव अभी तक भारत नहीं लाया जा सका है। उनका परिवार सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है, जबकि बांसगांव की स्थानीय पुलिस उन्हें सहयोग दे रही है। इस हमले में सऊदी नागरिक सुल्तान अल-काहतानी की भी जान गई है और दो भारतीयों समेत आठ अन्य लोग घायल हुए हैं।
यह घटना 21 अक्टूबर 2026 की रात को हुई। इससे पहले 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में हैदराबाद के मोहम्मद यूसुफ अली की मौत हो गई थी और कई भारतीय घायल हुए थे, जिनमें से कुछ अब भी आईसीयू में हैं। इसके अलावा शैबा ऑयलफील्ड पर हुए ड्रोन हमले में एक भारतीय घायल हुआ था, जिसे अब अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
हमलों के कारण विमान सेवाओं पर बुरा असर पड़ा है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद और दम्माम की उड़ानों को 7 नवंबर तक और जेद्दा की उड़ानों को 31 अक्टूबर तक निलंबित कर दिया है। इंडिगो और अकासा एयर ने भी कई उड़ानें रद्द की हैं, जबकि अकासा ने रियाद की फ्लाइट्स 30 नवंबर तक बंद रखी हैं।
इन व्यवधानों की वजह से हजारों भारतीय उमराह यात्री वहां फंसे हुए हैं। रियाद में भारतीय दूतावास और जेद्दा में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम बनाए हैं, जहां भोजन और दवाइयां बांटी जा रही हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में करीब 3,000 फंसे हुए तीर्थयात्रियों को घर लौटने में मदद की गई है।
भारतीय सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन हमलों की निंदा की है। अधिकारियों ने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर उन्हें सतर्क रहने और घटनाओं की वीडियो न बनाने की सलाह दी है। फरवरी में संघर्ष बढ़ने के बाद से अब तक 3 लाख से ज्यादा भारतीयों को वहां से निकाला जा चुका है।