कतर में 10 साल से फंसे भारतीय गौरव, कंपनी के कर्ज की वजह से छोड़ नहीं पा रहे देश
कॉर्पोरेट कर्ज के चलते एक भारतीय व्यक्ति पिछले 10 साल से कतर में फंसा है। वह न देश छोड़ पा रहा है और न ही कानूनी तौर पर काम कर पा रहा है।

दोहा: कतर में एक भारतीय व्यक्ति पिछले करीब दस सालों से फंसा हुआ है। गौरव नाम का यह व्यक्ति कॉर्पोरेट कर्ज के कारण न तो देश छोड़ पा रहा है और न ही वहां कानूनी तौर पर कोई नौकरी कर पा रहा है।
डिटेंड इन दुबई और डिटेंड इन दोहा के अभियान चलाने वालों के मुताबिक, गौरव और उनके दिवंगत पिता का नाम एक कंपनी के कमर्शियल रजिस्ट्रेशन में दर्ज था। गौरव ने अपनी बहन, जो लोकल स्पॉन्सर थीं, और अन्य गारंटर्स के साथ समझौते किए थे। हालांकि, गौरव का दावा है कि वह अलग नौकरी करते थे और कंपनी के खातों या कामकाज पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था।
साल 2017 में लोकल स्पॉन्सर ने गौरव के शेयर खरीद लिए थे और औपचारिक रूप से सभी देनदारियों की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद गौरव का नाम कमर्शियल रजिस्ट्रेशन से हटा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ कानूनी दावे जारी रहे। 2019 में उनके पिता की मृत्यु के बाद कंपनी की संपत्तियां जब्त कर ली गईं, जिससे कथित कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नहीं बचा।
बताया गया है कि शेष बचे लोकल पार्टनर ने गौरव और उनकी बहन को आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी है। इस पूरे विवाद के बीच गौरव का रेजिडेंसी स्टेटस खत्म हो गया, जिससे वह कानूनी रूप से काम करने और कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गए। इसी वजह से वह कतर से बाहर भी नहीं जा पा रहे हैं।
इस स्थिति ने गौरव के निजी जीवन को तबाह कर दिया है। वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, उनकी शादी टूट गई और वह अपनी बेटी से लंबे समय से अलग हैं। उनकी बुजुर्ग मां का स्वास्थ्य गिर रहा है, जबकि गौरव खुद वजन घटने और दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं। उनके पास भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं हैं।
डिटेंड इन दुबई और ड्यू प्रोसेस इंटरनेशनल की सीईओ राधा स्टर्लिंग ने इस मानवीय संकट की आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कर्ज वसूली के लिए किसी व्यक्ति को इस तरह बेसहारा छोड़ देना कितना सही है। स्टर्लिंग ने बताया कि इस क्षेत्र में कर्ज के कारण यात्रा प्रतिबंध के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अमेरिकी नागरिक ब्रूस स्ट्रिकलैंड और डेविड ओलिवर के नाम शामिल हैं।
राधा स्टर्लिंग ने भारतीय सरकार से इस मामले में तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की है ताकि मानवीय आधार पर समाधान निकल सके। गौरव ने भारतीय दूतावास से भी अपील की थी, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। 2 नवंबर 2026 को स्टर्लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मामले को सार्वजनिक किया, जिसके बाद गौरव के परिवार ने उनके रहने, इलाज और कानूनी खर्चों के लिए फंड जुटाना शुरू किया है।