Dubai में भारतीय प्रवासी की कार के अंदर मिली लाश, केरल के फिरोज की मौत से ग़म में डूबे लोग

दुबई में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहाँ केरल के रहने वाले 32-year-old भारतीय प्रवासी T.V. Firoz अपनी कार के अंदर मृत पाए गए। यह दुखद घटना 20 September 2026 को हुई, जिससे उनके परिवार और दोस्तों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। फिरोज मूल रूप से भारत के केरल राज्य के कासरगोड जिले के कान्हाങ്ങാड के रहने वाले थे और दुबई में अपने भाइयों अशरफ और जैनुद्दीन के साथ मिलकर एक सुपरमार्केट संभालते थे। उनके अचानक यूं चले जाने से हर कोई हैरान और परेशान है।
कैसे सामने आया पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, फिरोज जब बाहर गए थे और वापस नहीं लौटे तो उनके परिवार और जान-पहचान के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की। इसके बाद 19 September को वह अपनी कार के अंदर बेसुध हालत में मिले। परिवार के लोगों ने बिना देर किए उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से प्रवासी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है और हर कोई इस अनहोनी से सदमे में है।
भारतीय दूतावास ने जारी की जरूरी गाइडलाइंस
इस हादसे के बाद दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने मौत के पंजीकरण और शव को वापस देश भेजने की प्रक्रियाओं को एक बार फिर से दोहराया है। दूतावास ने साफ किया है कि दुबई, शारजाह, अजमान, फुजैरा, रस अल खैमाह और उम्म अल क्वेन में किसी भी भारतीय की मृत्यु होने पर परिवार या नियोक्ता सीधे 24/7 helpline number +971 50 734 7676 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा [email protected] पर ईमेल भी किया जा सकता है। प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र के टोल-फ्री नंबर 800 46342 या व्हाट्सएप नंबर +971 54 309 0571 पर भी अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई गई है। अबू धाबी के मामलों के लिए भारतीय दूतावास के नंबर +971 56 403 8863 पर संपर्क किया जा सकता है।
शव वापस भेजने और कागजी कार्रवाई के नियम
दुबई में किसी की मृत्यु होने पर कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कई तरह के दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इसमें मुख्य रूप से यूएई द्वारा जारी किया गया मृत्यु प्रमाण पत्र, डेथ नोटिफिकेशन, मृतक का मूल पासपोर्ट, अमीरात आईडी या वीजा की कॉपी, स्पॉन्सर या कंपनी का पत्र, पारिवारिक अनुमति और संबंधित पुलिस या फोरेंसिक रिपोर्ट शामिल होती हैं। यदि मौत के कारणों को लेकर कोई संशय हो, तो पुलिस और फोरेंसिक दस्तावेज बीमा दावों और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए बहुत अहम माने जाते हैं।
नियोक्ता की जिम्मेदारी और जरूरी सावधानियां
यूएई के संघीय डिक्री कानून संख्या 33 of 2021 के अनुच्छेद 15(3) के मुताबिक, कर्मचारियों के शव को उनके गृह देश भेजने और उसकी तैयारी का खर्च उठाने की जिम्मेदारी कंपनी या नियोक्ता की होती है। भारतीय वाणिज्य दूतावास ने परिवारों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों का ही इस्तेमाल करें और किसी भी अनजान या फर्जी प्राइवेट एजेंट के चक्कर में न पड़ें। यदि किसी मामले में नियोक्ता मौजूद नहीं है या बीमा राशि कम पड़ जाती है, तो भारतीय सामुदायिक कल्याण कोष से भी मदद मिल सकती है। परिवारों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे सभी कागजात पूरे करने से पहले नियोक्ताओं से लंबित वेतन, सेवा समाप्ति के लाभ और बीमा समझौतों का लिखित रिकॉर्ड जरूर ले लें।