कर्ज विवाद में कतर में फंसा भारतीय, 10 साल से नहीं मिल पाया घर लौटने का रास्ता

कतर में कर्ज विवाद के कारण एक भारतीय नागरिक पिछले 10 साल से फंसा हुआ है। वह न काम कर पा रहा है और न ही घर लौट पा रहा है।

Satyam Kumari2 November 20262 min read0 viewsQatar
कर्ज विवाद में कतर में फंसा भारतीय, 10 साल से नहीं मिल पाया घर लौटने का रास्ता

दोहा: कतर में एक भारतीय नागरिक गौरव पिछले करीब दस सालों से कानूनी उलझनों और कर्ज के विवाद में फंसा हुआ है। इस कानूनी गतिरोध की वजह से उसका रेजिडेंसी स्टेटस खत्म हो चुका है, जिससे वह न तो नौकरी कर पा रहा है और न ही अपने देश वापस लौट पा रहा है।

डिटेंड इन दुबई और डिटेंड इन दोहा जैसे एडवोकेसी ग्रुप्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 नवंबर 2026 तक गौरव पूरी तरह बेसहारा हो चुका है। वह उन कर्जों को चुकाने में असमर्थ है, जिनके बारे में उसका दावा है कि उसने उन्हें कभी लिया ही नहीं था।

जानकारी के अनुसार, गौरव और उसके दिवंगत पिता का नाम एक कंपनी के कमर्शियल रजिस्ट्रेशन में दर्ज था। हालांकि, गौरव का कहना है कि उस बिजनेस पर उसका कभी कोई मैनेजरियल या वित्तीय नियंत्रण नहीं रहा। साल 2017 में कंपनी के लोकल स्पॉन्सर ने उसके शेयर खरीद लिए थे और सारी देनदारियों की जिम्मेदारी ली थी, जिसके बाद गौरव का नाम रजिस्ट्री से हटा दिया गया था।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

2019 में गौरव के पिता की मृत्यु के बाद कंपनी की संपत्तियां जब्त कर ली गईं। इसके बावजूद, लोकल पार्टनर ने गौरव और उसकी बहन के खिलाफ आपराधिक शिकायतें दर्ज कराना जारी रखा। रेजिडेंसी स्टेटस न होने के कारण गौरव कानूनी तौर पर काम नहीं कर सकता, जिससे वह कथित कर्ज चुकाने में असमर्थ है और उस पर देश छोड़ने पर पाबंदी है।

इस पूरी परिस्थिति का गौरव के निजी जीवन पर गहरा असर पड़ा है। वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका, उसकी शादी टूट गई और वह अपनी छोटी बेटी का सहारा बनने में असमर्थ है। वह दिल की एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है जिसका इलाज नहीं हो पाया है और उसके पास खाने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी पैसे नहीं हैं।

गौरव के परिवार का कहना है कि उन्होंने दोहा स्थित भारतीय दूतावास से कई बार मदद मांगी, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। डिटेंड इन दुबई और ड्यू प्रोसेस इंटरनेशनल की सीईओ राधा स्टर्लिंग ने इस व्यवस्था की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कर्ज वसूली के नाम पर लोगों की जिंदगी बर्बाद की जा रही है।

स्टर्लिंग ने गौरव की स्थिति की तुलना यूएई के ब्रूस स्ट्रिकलैंड और दिवंगत डेविड ओलिवर जैसे विदेशी नागरिकों के मामलों से की। उन्होंने इस मामले में मानवीय आधार पर समाधान निकालने के लिए तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की है। गौरव के परिवार ने अब उसकी कानूनी फीस और मेडिकल खर्चों के लिए फंड जुटाना शुरू कर दिया है।

Share:

Comments

Leave a comment