सऊदी अरब में फंसे भारतीय तीर्थयात्रियों को घर लाने के लिए विदेश मंत्रालय ने एयरलाइंस और टूर ऑपरेटरों से शुरू की बातचीत
विदेश मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरब में फंसे भारतीय उमराह यात्रियों को घर लाने के लिए एयरलाइंस और टूर ऑपरेटरों के साथ बातचीत जारी है।

नई दिल्ली: सऊदी अरब में फंसे भारतीय उमराह यात्रियों की सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए विदेश मंत्रालय पूरी कोशिश कर रहा है। मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास संबंधित एयरलाइंस और टूर ऑपरेटरों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि यात्रियों की वापसी की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में एक द्विसाप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान जानकारी दी कि पिछले सात दिनों में करीब 3,000 फंसे हुए उमराह यात्री अपने घर लौट आए हैं। इसके अलावा 10,000 से अधिक सामान्य उमराह यात्रियों ने भी अपनी यात्रा पूरी कर ली है और वे उपलब्ध उड़ानों से वापस आ गए हैं।
जायसवाल ने बताया कि अन्य उमराह यात्रियों की जल्द से जल्द वापसी के लिए जरूरी इंतजामों पर चर्चा की जा रही है। दूतावास और वाणिज्य दूतावास उन लोगों के संपर्क में हैं जो वहां फंसे हुए हैं। समुदाय के स्वयंसेवकों के सहयोग से उन्हें हर संभव सहायता और सेवा दी जा रही है।
भारतीय नागरिकों की मदद के लिए रियाद और जेद्दा दोनों जगहों पर 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। साथ ही नियमित रूप से एडवाइजरी जारी की जा रही है ताकि वहां मौजूद भारतीयों को जमीनी हालात की सही जानकारी मिल सके।
दूसरी ओर, भारत सरकार ने सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने विशेष रूप से 21 अक्टूबर को दम्माम के किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पूर्वी प्रांत में सऊदी अरामको के शायबाह तेल क्षेत्र पर हुए हमलों की आलोचना की है।
विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि दम्माम एयरपोर्ट की घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और दो अन्य घायल हुए। वहीं शायबाह तेल क्षेत्र पर हुए हमले में भी एक भारतीय नागरिक घायल हुआ है। अधिकारियों ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
भारत ने सऊदी अरब की क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की सरकार और जनता के साथ एकजुटता जताई है। मंत्रालय ने कहा कि नागरिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद होना चाहिए।