भारतीय पायलट ने फ्लाईदुबई विमान को हाईजैक होने से बचाया

आसमान की ऊंचाइयों पर सफर कर रहे यात्रियों की जिंदगी उस वक्त खतरे में पड़ गई, जब एक उड़ान के दौरान कॉकपिट के भीतर ही खौफनाक संघर्ष शुरू हो गया। अपनी सूझबूझ और असाधारण बहादुरी का परिचय देते हुए एक भारतीय पायलट ने बीच हवा में हुए हमले को नाकाम कर दिया और एक बड़ी त्रासदी टाल दी। इस घटना ने पूरी दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री को चौंका कर रख दिया है।
दुबई से तेल अवीव जा रही थी उड़ान
यह घटना फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट एफजेड 1073 के दौरान घटी, जो दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 174 यात्रियों और 6 क्रू मेंबर के साथ तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। विमान जब सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिम हिस्से के ऊपर उड़ान भर रहा था, तभी कॉकपिट के अंदर स्थिति अचानक बेकाबू हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान ने अचानक खतरनाक तरीके से नीचे गोता लगाना शुरू कर दिया, जिससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। विमान ने एक आपातकालीन हाईजैक सिग्नल भी भेजा था।
कॉकपिट में सह-पायलट ने किया हमला
जांच में सामने आया कि उड़ान के दौरान सह-पायलट, जो कि ओमान का नागरिक था, ने अचानक कैप्टन पर हमला कर दिया। उसने कॉकपिट की इमरजेंसी कुल्हाड़ी का इस्तेमाल कर कैप्टन को घायल करने की कोशिश की। हमले में भारतीय मूल के कैप्टन स्मीत मच्छड़ के सिर और उंगलियों पर गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन मच्छड़ ने हार नहीं मानी और अपनी हिम्मत बनाए रखी।
यात्रियों की सूझबूझ से टला बड़ा खतरा
कैप्टन मच्छड़ ने संघर्ष करते हुए किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्रियों को अंदर झांकने और मदद करने का मौका मिल गया। विमान में सवार एक यात्री यानिव हायून ने तुरंत साहस दिखाते हुए हमलावर सह-पायलट को दबोच लिया और उसे अपनी बांहों के शिकंजे में कस लिया। इसके बाद अन्य यात्रियों की मदद से हमलावर को हेडफोन के तार और जिप टाई से बांध दिया गया। एक अन्य यात्री, जो पेशे से दंत चिकित्सक थे, ने तुरंत कैप्टन और घायल व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा दी। इसके बाद क्रू के अन्य सदस्यों ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लिया और सऊदी अरब के ताबूक में विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई।
प्रधानमंत्री मोदी ने की तारीफ
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों पायलटों को अस्पताल पहुंचाया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मीत मच्छड़ से वीडियो कॉल पर बात कर उनकी अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा की जमकर सराहना की। यूएई में भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने भी उनकी सेहत की स्थिरता की पुष्टि की। अपनी 17 साल की लंबी उड़ान के अनुभव और सूझबूझ से इस भारतीय कैप्टन ने अनगिनत जिंदगियां बचाकर एक मिसाल कायम कर दी है।