ओमान तट के पास ड्रोन हमले में गुजरात के जहाज पर सवार भारतीय नाविक की मौत
ओमान तट के पास गुजरात के जहाज MSV Al Jusufi पर ड्रोन हमले में भारतीय नाविक नाहिम अजीज गंधार की मौत हो गई।

ओमान: ओमान तट के पास एक अज्ञात हवाई वस्तु (ड्रोन) के हमले में एक भारतीय नाविक की जान चली गई। यह हमला 2 नवंबर को लिमाह के पास भारतीय ध्वज वाले जहाज MSV Al Jusufi पर हुआ, जिसमें सवार 25-26 वर्षीय नाविक नाहिम अजीज गंधार की मौत हो गई।
यह जहाज गुजरात के बेदी पोर्ट में रजिस्टर्ड एक पारंपरिक धो-स्टाइल कार्गो क्राफ्ट था, जिसका मालिकाना हक सालाया के एक परिवार के पास है। जहाज यूएई के हमरैया पोर्ट से पोरबंदर के लिए करीब 900 मीट्रिक टन खजूर लेकर जा रहा था।
शाम करीब 4:45 बजे, जब जहाज ओमान के तट से महज दो किलोमीटर दूर था, तब उस पर प्रहार हुआ। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे पूरा जहाज और उसमें लदा सामान जलकर राख हो गया। इस हादसे में करीब 2 से 3 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
हादसे के वक्त नाहिम अजीज गंधार जहाज के संचालन (हेल्म) पर थे। हमले में उनके पैर और हाथ गंभीर रूप से कट गए थे। उन्हें खसाब पोर्ट ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। ओमान कोस्ट गार्ड ने जहाज के बाकी 13 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया, जो सभी देवभूमि द्वारका जिले के सालाया के रहने वाले हैं। सरकारी कागजी कार्रवाई में देरी के कारण परिवार ने गंधार को खसाब, ओमान में ही दफनाने का फैसला किया है।
इस घटना ने परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है। जहाज के मालिक के रिश्तेदार अकबर अहमद सुंभानिया और चचेरे भाई इरफान के मुताबिक, यह परिवार के लिए बहुत बड़ी त्रासदी है। करीब 20 साल पहले गंधार के पिता अजीजभाई की भी दुबई से लौटते समय एक चक्रवात में समुद्र में मौत हो गई थी, जिनका शव कभी नहीं मिला था।
इंडियन सेलिंग वेसल्स एसोसिएशन के अनुसार, फरवरी 2026 से अब तक भारतीय जहाजों पर यह चौथा हमला है, जिसमें दो गुजराती नाविकों की जान गई है। एसोसिएशन ने सुरक्षित मार्ग के प्रोटोकॉल के लिए ईरानी राजदूत से अपील की है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की निंदा की है और व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना बंद करने तथा मुक्त नौवहन बहाल करने की मांग की है। शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए शोक व्यक्त किया है।
क्षेत्र में अमेरिका, इजरायल, ईरान और उनके समर्थकों के बीच चल रहे संघर्ष के बीच यह एक और जानलेवा घटना है। रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में 22-23 भारतीयों की मौत हो चुकी है। तनाव के कारण 3 लाख से ज्यादा भारतीय इस क्षेत्र से लौट चुके हैं, जबकि लाखों लोग अब भी यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कतर और बहरीन में रह रहे हैं।