ओमान के तट पर ड्रोन हमले के बाद तेल टैंकर के दो भारतीय नाविक लापता

सोहार (ओमान): ओमान के तट के पास 11 अक्टूबर को निकारागुआ के झंडे वाले तेल टैंकर MT Petro Dolphin पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें दो भारतीय नाविक अब तक नहीं मिले हैं। सोहार एंकरेज में ड्रोन जहाज़ से टकराया, जिसके बाद जहाज़ पर भारी आग और धुआं उठता दिखा।
जहाज़ पर सवार नौ भारतीय चालक दल के सदस्यों और एक बांग्लादेशी नागरिक को स्थानीय मछुआरों और तटरक्षक बल ने बचा लिया। अमित सिंह और बीर बहादुर यादव का कोई पता नहीं चल पाया है। चालक दल की ओर से बनाया गया एक वीडियो हमले के बाद के हालात को दिखाता है।
अमित सिंह 20 साल के हैं और उत्तर प्रदेश के गोपाला गांव के रहने वाले हैं। जनवरी से वे एबल सीमैन के तौर पर काम कर रहे थे, ताकि परिवार को सहारा दे सकें। उनके चाचा रविंदर सिंह ने बताया कि परिवार को अब उनके बचने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि अमित ड्रोन के टकराने की जगह के बिल्कुल पास काम कर रहे थे।
बीर बहादुर यादव 25 साल के हैं और जहाज़ पर वाइपर के पद पर थे। वे अपना नौ महीने का अनुबंध पूरा करने में लगे थे। उनके बड़े भाई मंटू यादव, जो अबू धाबी में रहते हैं, ने कहा कि परिवार गहरे सदमे में है, हालांकि बचाव की हल्की उम्मीद अब भी बची है।
इस हमले की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है। यह घटना खाड़ी ओमान और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में चल रहे तनाव के बीच हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के मुताबिक फरवरी से इस क्षेत्र में 104 घटनाएं हुई हैं, जिनमें 24 नाविकों की मौत हो चुकी है।
केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि भारत इस मामले में ओमान के साथ तालमेल कर रहा है। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर नज़र रखे हुए है। फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने लापता नाविकों के बारे में तुरंत अपडेट और समुद्री कर्मियों की बेहतर सुरक्षा की मांग की है।
इसी से जुड़ी एक और घटना में 10 अक्टूबर को सऊदी अरब के रियाद स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के एक प्रक्षेप्य का हमला हुआ। इसमें 13 लोगों की मौत हुई, जिनमें हैदराबाद के 46 वर्षीय आईटी पेशेवर मोहम्मद यूसुफ अली भी शामिल थे। इस हमले में 300 से ज्यादा लोग घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय थे।
भारत सरकार ने इस हिंसा की निंदा की है, और भारतीय एयरलाइनों ने सऊदी अरब की उड़ानें रोक दी हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक खाड़ी क्षेत्र से तीन लाख से ज्यादा भारतीयों को वापस लाया जा चुका है।