Strait of Hormuz में फंसे 139 भारतीय नाविक, 11 की मौत की पुष्टि

पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और संघर्ष के बीच भारतीय नाविकों के लिए बुरी खबर सामने आई है। Strait of Hormuz में फंसे 139 भारतीय नाविकों के बीच 11 की मौत की पुष्टि हो गई है। यह जानकारी बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित 'सागर मंथन संवाद' के दौरान दी।
दरअसल, 28 फरवरी 2026 से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों पर मिसाइल हमलों का सिलसिला बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक भारतीय झंडे वाले चार जहाजों पर हमले हुए हैं, जबकि विदेशी जहाजों पर सवार भारतीय चालक दल के सदस्यों के साथ 74 घटनाएं घट चुकी हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक लगभग 4,200 से 4,292 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
संकट में फंसे नाविक और सरकार की तैयारी
वर्तमान स्थिति यह है कि दो भारतीय झंडे वाले जहाज और भारत की ओर आ रहे छह अन्य जहाज अभी भी Strait of Hormuz में फंसे हुए हैं। मंत्रालय ने इन नाविकों की सुरक्षा के लिए एक 'लाइव ट्रैकिंग सिस्टम' लागू किया है, जिससे जहाजों की लोकेशन, चालक दल की संख्या, खतरों का आकलन और भोजन, ईंधन व दवाओं की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है। इसके बावजूद, फंसे हुए 139 नाविकों की पहचान और उनके गृह राज्यों का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
विदेश मंत्रालय ने व्यावसायिक जहाजों पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई है। हाल ही में पनामा के झंडे वाले एक जहाज पर हमले में 11 भारतीय चालक दल के सदस्य घायल हुए थे। वहीं, काला सागर (Black Sea) में एक रूसी ड्रोन हमले के कारण तुर्की के मालवाहक जहाज में आग लग गई, जिसमें एक भारतीय नाविक घायल हुआ।
इस अस्थिरता का असर हवाई यात्रा पर भी पड़ा है। दुबई इंटरनेशनल और अबू धाबी के जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 8 और 9 अक्टूबर को कई उड़ानें रद्द या विलंबित हुईं। एमिरेट्स और इतिहाद जैसी एयरलाइनों ने रियाद, कुवैत, दम्माम और बहरीन के लिए अपनी सेवाओं में कटौती की है।
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिसकी वैश्विक वर्कफोर्स में हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से अधिक है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इस हिस्सेदारी को 20 प्रतिशत तक ले जाना है। संघर्ष क्षेत्रों में जान गंवाने वाले नाविकों के लिए 'सीफेयरर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी' द्वारा 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि का प्रावधान है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार अब तक केवल कुछ ही मामलों में यह राशि प्रदान की जा सकी है।