Oman के पास जहाज पर मिसाइल हमला, भारत के युवा नाविक सूरज यादव की मौत.

ओमान के तट के पास एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां कमर्शियल शिप पर हुए मिसाइल हमले में भारत के एक युवा नाविक की दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद से मृतक के परिवार और गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के बीच गहरी चिंता का माहौल बन गया है। सुरक्षा को लेकर अब कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं क्योंकि लगातार क्षेत्रीय तनाव का खामियाजा आम कामगारों और नौसेना कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
घटना की पूरी जानकारी और नुकसान
यह हमला 23 सितंबर 2026 को हुआ था जब एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाला कोल बल्क कैरियर जहाज MV Cape Dao ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था। यह जहाज यूएई के मीना साक़र से भारत की तरफ आ रहा था तभी अचानक इस पर दो मिसाइलों से हमला कर दिया गया। फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया यानी FSUI के अनुसार, एक मिसाइल जहाज के सी-डेक रहने वाले हिस्से पर गिरी और दूसरी मिसाइल इंजन रूम के पास मुख्य हिस्से से टकराई। इस भयानक टक्कर के बाद मशीनरी वाले हिस्से में भीषण आग लग गई।
इस खतरनाक हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कर्माजीपुर अहिरवती टोला के रहने वाले 26 वर्षीय भारतीय नाविक सूरज यादव की सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। जहाज पर कुल 28 क्रू मेंबर सवार थे जिसमें से 20 भारतीय नागरिक शामिल थे। ओमान की रॉयल नेवी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 27 लोगों को सुरक्षित बचा लिया जिसमें 19 भारतीय भी शामिल थे। हालांकि इस हमले में सूरज यादव के अलावा एक अन्य क्रू मेंबर की भी जान चली गई। मृतक सूरज अपने परिवार के तीन छोटे भाइयों का सहारा बनने और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए इसी साल अगस्त के महीने में मर्चेंट नेवी में शामिल हुए थे लेकिन किसी को नहीं पता था कि इतनी जल्दी यह बड़ा हादसा हो जाएगा।
प्रवासियों की सुरक्षा और सरकारी आंकड़े
गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए यह साल बहुत ही तनावपूर्ण और खतरनाक रहा है। संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान कुल 16 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है जिसमें 10 नाविक भी शामिल हैं। अकेले ओमान के पानी में इस तरह की 8 मौतें हुई हैं जबकि यूएई में 4, कुवैत में 2 और सऊदी अरब तथा इराक में 1-1 मौत दर्ज की गई है। इसके अलावा इन हमलों में करीब 75 भारतीय घायल भी हुए हैं। कतर के रास लाफ्तान में गैस फैसिलिटी में हुए एक अलग हादसे में भी 12 भारतीयों की जान चली गई थी।
इस पूरी स्थिति को लेकर भारत सरकार का विदेश मंत्रालय यानी MEA पूरी तरह गंभीर है। मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचा और कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है। मस्कट में स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी लगातार राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ शवों को वापस लाने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी मदद देने का भरोसा दिया है और यह भी कहा है कि सूरज यादव के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके घर पहुंचाया जाएगा।
यूनियन की मांग और गल्फ में भारतीयों की स्थिति
इस घटना के बाद से नाविक यूनियन ने सरकार के सामने कड़ी सुरक्षा की मांग रखी है। FSUI ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अपील की है कि तुरंत एक क्राइसिस सेल बनाया जाए और भारतीय जहाजों को नौसेना की सुरक्षा यानी एस्कॉर्ट दी जाए। यूनियन का कहना है कि लगातार नाविकों को निशाना बनाया जा रहा है, जिसमें इसी साल जून के महीने में देवरिया के ही रहने वाले एक और नाविक शिवानंद चौरसिया की भी टैंकर Settebello पर हुए हमले में जान चली गई थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक छह जीसीसी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं जिनमें अकेले यूएई में 43 लाख और सऊदी अरब में 27 लाख लोग शामिल हैं, जो इस तरह की क्षेत्रीय उठापटक के बीच अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए मजबूर हैं।