उज्बेकिस्तान में मेडिकल पढ़ाई के लिए जा रहे भारतीय छात्र धोखाधड़ी से बचें: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने उज्बेकिस्तान में मेडिकल पढ़ाई के लिए जा रहे भारतीय छात्रों को धोखाधड़ी और घटिया शिक्षा से बचने की सलाह दी है।

Gautam Sahu3 November 20262 min read0 viewsWorld
उज्बेकिस्तान में मेडिकल पढ़ाई के लिए जा रहे भारतीय छात्र धोखाधड़ी से बचें: विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली: उज्बेकिस्तान में मेडिकल और अन्य कोर्स करने जा रहे भारतीय छात्रों को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) ने सतर्क किया है। मंत्रालय ने कहा है कि सरकार इस बात पर ध्यान दे रही है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वे किसी भी तरह के गलत तत्वों के चंगुल में न फंसें।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत सरकार उज्बेकिस्तान के साथ लगातार संपर्क में है ताकि वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों की समस्याओं का समाधान हो सके। जायसवाल ने जोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भारत या उज्बेकिस्तान, किसी भी देश में मौजूद संदिग्ध लोग छात्रों को गुमराह न करें और उनका शोषण न करें।

उज्बेकिस्तान जाने वाले भारतीय छात्रों और मेडिकल उम्मीदवारों की संख्या में आई गिरावट पर सवाल पूछे जाने पर प्रवक्ता ने कहा कि नई दिल्ली इस मामले में उज्बेकिस्तान के अधिकारियों के साथ बातचीत जारी रखे हुए है।

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रणधीर जायसवाल ने छात्रों और अभिभावकों को ताशकंद स्थित भारतीय दूतावास और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी एडवाइजरी को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इन दिशा-निर्देशों में विदेशी मेडिकल संस्थानों में प्रवेश लेने के लिए जरूरी सावधानियां बताई गई हैं। सरकार चाहती है कि छात्रों को ऐसी शिक्षा मिले जो NMC के मानकों और गाइडलाइन्स के अनुरूप हो।

इससे पहले 1 अप्रैल को नेशनल मेडिकल कमीशन ने उज्बेकिस्तान के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए एक चेतावनी जारी की थी। ताशकंद दूतावास द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद यह कदम उठाया गया था, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता और एडमिशन कराने वाले एजेंटों द्वारा की जा रही गड़बड़ियों का जिक्र था।

NMC ने बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट, समरकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी और बैंगलोर स्थित TIT इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जो ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी की टर्मेज़ शाखा से जुड़ा है) का विशेष उल्लेख किया था। कमीशन ने आशंका जताई थी कि कुछ कॉलेज अपनी क्षमता से अधिक छात्रों को प्रवेश दे रहे हैं, जिससे पढ़ाई की क्वालिटी गिर सकती है।

रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया था कि भाषा की समस्या के कारण भारतीय छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग में दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि वहां शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी नहीं था। NMC ने साफ किया कि छात्रों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका कोर्स भारत की जरूरतों को पूरा करता हो, जिसमें एक ही संस्थान में कम से कम 54 महीने की पढ़ाई और उसी यूनिवर्सिटी में 12 महीने की इंटर्नशिप शामिल हो।

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