Oman में फंसे यूपी के मुशीर अब्बास, पासपोर्ट जब्त और बिना वेतन के कमरे से निकाला बाहर

ओमान के सलालाह शहर में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के रहने वाले एक भारतीय मजदूर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। रोजगार की तलाश में विदेश गए इस शख्स को वहां धोखे और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका परिवार बेहद चिंतित है। सोशल मीडिया के जरिए परिवार ने अपनी इस दर्द भरी दास्तान को साझा किया है और सरकारी मदद की गुहार लगाई है। विदेश में नौकरी करने जाने वाले आम भारतीय कामगारों के लिए इस तरह की घटनाएं एक बड़ी चेतावनी और चिंता का विषय बनती जा रही हैं, जहां उन्हें वादों के उलट मुश्किल हालात में छोड़ दिया जाता है।
क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुई परेशानी
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के उतरौला क्षेत्र के रहने वाले मुशीर अब्बास बीते 29 मई 2026 को ओमान पहुंचे थे। उन्हें वहां की एक जानी-मानी कंपनी Al Hosn Furniture Factory में कुशल असबाब यानी अपहोल्स्ट्री के काम के लिए बुलाया गया था। लेकिन ओमान पहुंचने के बाद कंपनी और वहां के स्थानीय प्रायोजक यानी कफील ने उनके साथ धोखा किया। उन्हें जिस काम के लिए बुलाया गया था, वह न देकर उनसे भारी मैनुअल मजदूरी कराई जाने लगी। मुशीर से प्लाईवुड उतारने और फर्नीचर इधर-उधर खिसकाने जैसे शारीरिक रूप से कठिन काम कराए गए, जिसका उन्होंने विरोध किया। काम बदलने और अपनी मर्जी के खिलाफ काम करने से मना करने पर पाकिस्तानी फोरमैन और कफील ने उन्हें एक कमरे में लगभग दस दिनों तक अकेला बंद करके रख दिया।
पासपोर्ट छीनकर मांग रहे हैं एग्जिट फाइन
मुशीर के परिवार ने जानकारी दी है कि ओमान पहुंचते ही उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था। इसके अलावा उनका रेजिडेंस कार्ड, जो करीब 20 दिन पहले ही जारी हुआ था, उसे भी अपने पास रोक कर रखा गया है। जब मुशीर ने वहां से वापस आने या अपने हक की बात कही, तो प्रायोजक ने उन्हें छोड़ने के एवज में 300 ओमान रियाल यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग ₹65,000 का भारी-भरकम एग्जिट फाइन चुकाने की मांग रख दी। हैरानी की बात यह है कि इतने महीनों की मेहनत के बाद भी मुशीर का डेढ़ से दो महीने का वेतन कंपनी ने रोक रखा है, जिससे उनके पास खाने-पीने और जीने का कोई साधन नहीं बचा है।
कमरे से निकाला बाहर और डॉक्यूमेंट्स भी गायब
प्रताड़ना का सिलसिला यहीं नहीं रुका। पिछले गुरुवार को वहां के फोरमैन ने मुशीर को उनका कमरा खाली करने का सख्त आदेश दे दिया, जिसके बाद उन्हें बेघर होना पड़ा। उनके साथ काम करने वाले दो अन्य सहकर्मी भी इसी तरह के बुरे हालातों से जूझते हुए हाल ही में वापस भारत लौट आए हैं, लेकिन मुशीर के पास न तो कोई कानूनी दस्तावेज बचा है और न ही रहने के लिए कोई छत। मुशीर इस समय ओमान के सलालाह शहर के As Sinayat Al Jadidah इलाके में पूरी तरह बेसहारा घूम रहे हैं। उनके पास इस समय केवल एक मोबाइल नंबर +968 71781446 है, जिसके जरिए वे संपर्क में हैं।
परिवार ने सोशल मीडिया पर लगाई गुहार
मुशीर के भाई ने मस्कट स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करने की कई बार कोशिश की, लेकिन आरोप है कि उनके ईमेल और फोन कॉल्स का कोई ठोस जवाब नहीं मिला और फोन अक्सर बीच में ही काट दिए जाते हैं। इसके बाद हार मानकर परिवार ने 24 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक एसओएस मैसेज जारी किया। परिवार ने मुशीर की तस्वीरें और उनका संपर्क नंबर सार्वजनिक करते हुए भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई। इस अपील में देश के प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्री S. Jaishankar, विदेश मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को टैग किया गया है। शुक्रवार शाम 25 सितंबर 2026 तक की स्थिति यह है कि मुशीर ओमान की धरती पर बिना किसी दस्तावेज और आश्रय के दिन गुजार रहे हैं। परिवार ने अपनी तरफ से संपर्क के लिए व्हाट्सएप नंबर +91 9372376531 साझा किया है, जबकि कंपनी का पता PO Box PC211, Salalah बताया गया है।