Indus Waters Treaty: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर कोर्ट का बड़ा फैसला, भारत ने किया खारिज.

हेग स्थित Permanent Court of Arbitration (PCA) ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि साल 1960 की सिंधु जल संधि यानी Indus Waters Treaty पूरी तरह से लागू है और भारत तथा पाकिस्तान दोनों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है। कोर्ट ने भारत के उस दावे को साफ तौर पर खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि इस संधि को एकतरफा तरीके से निलंबित या खत्म किया जा सकता है। अदालत ने संप्रभुता, सीमा पार आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी बदलावों से जुड़े सभी तर्कों को नामंजूर कर दिया और स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कोई भी देश इस तरह के समझौते को अकेले रद्द नहीं कर सकता है।
पाकिस्तान की अपील पर हुई सुनवाई
यह पूरी कानूनी प्रक्रिया इसी साल मार्च 2026 में पाकिस्तान द्वारा शुरू की गई थी। भारत ने अप्रैल 2025 में भारतीय प्रशासित कश्मीर में हुए एक हमले के बाद यह घोषणा की थी कि सिंधु जल संधि को स्थगित यानी abeyance में रखा जा रहा है। इसके बाद अदालत ने 26 से 28 अप्रैल 2026 के बीच सुनवाई की जिसमें केवल पाकिस्तान ने हिस्सा लिया। अमेरिका के प्रोफेसर Sean D. Murphy की अध्यक्षता में बनी इस कोर्ट में बेल्जियम, जॉर्डन और ऑस्ट्रेलिया के सदस्य भी शामिल थे। अदालत ने अंतरिम आदेश देते हुए भारत को रतले हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट यानी RHEP के बांध और बिजली से जुड़े निर्माण कार्य को तय सीमा से आगे बढ़ाने से रोक दिया है। यह रोक विश्व बैंक द्वारा नियुक्त एक अलग न्यूट्रल एक्सपर्ट के अंतिम फैसले के 90 दिनों बाद तक लागू रहेगी, जिसकी रिपोर्ट जुलाई 2027 के आसपास आने की उम्मीद है।
भारत सरकार ने फैसले को नकारा
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारत की तरफ से संधि के नियमों को टालने की कोशिशें नाकाम हो गई हैं और दोनों देशों को इसका पालन करना होगा। दूसरी तरफ, भारत के विदेश मंत्रालय यानी Ministry of External Affairs ने इस फैसले के आने के कुछ ही घंटों के भीतर इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। भारत का कहना है कि यह ट्रिब्यूनल गैर-कानूनी तरीके से बनाया गया था और इसे भारत के संप्रभु फैसलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। भारतीय सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला पहले की तरह लागू रहेगा और इस अदबारी फैसले का भारत के रुख पर कोई असर नहीं पड़ेगा।