घायल भारतीय पायलट कैप्टन स्मीत मच्छार अबू धाबी एयरलिफ्ट

आसमान में एक उड़ान के दौरान जब अप्रत्याशित खतरा सामने आया, तो एक भारतीय पायलट ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से सैकड़ों यात्रियों की जान बचा ली। फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान हुए एक गंभीर कॉकपिट हमले में घायल हुए भारतीय कैप्टन स्मीत मच्छार को आखिरकार सऊदी अरब के तबुक से बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए अबू धाबी एयरलिफ्ट कर लिया गया है। इस सनसनीखेज घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
क्या है पूरी घटना?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 ने 39 वर्षीय कैप्टन स्मीत मच्छार के नेतृत्व में 174 यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान विमान के कॉकपिट में अचानक अप्रत्याशित और खतरनाक स्थिति पैदा हो गई। सह-पायलट द्वारा किए गए कथित हमले में कैप्टन गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थिति इतनी खतरनाक थी कि विमान को आपातकालीन स्थिति का सामना करना पड़ा।
- विमान ने पहले सामान्य आपातकाल के लिए 'Squawk 7700' सिग्नल दिया।
- इसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 'Squawk 7500' (अवैध हस्तक्षेप) कोड का इस्तेमाल किया गया।
- विमान ने कुछ ही सेकंड में भारी ऊंचाई से नीचे गोता लगाया और इसे सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट (तबुक) पर सुरक्षित उतारा गया।
बहादुरी की मिसाल बने कैप्टन मच्छार
खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन स्मीत मच्छार ने हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। उनकी इस त्वरित कार्रवाई का फायदा उठाते हुए विमान में सवार दो अन्य ऑफ-ड्यूटी फ्लाईदुबई पायलटों ने तुरंत कमान संभाली। साथ ही, विमान में मौजूद एक दंत चिकित्सक ने जमीन पर उतरने से पहले कैप्टन के घावों का प्राथमिक उपचार किया, जिससे उनकी जान बचाने में मदद मिली।
अबू धाबी स्थानांतरण और उच्च स्तरीय जांच
सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने सह-पायलट द्वारा किए गए हमले की शुरुआती पुष्टि की है। चिकित्सा मंजूरी मिलने के बाद, दोनों पायलटों को एक अमीराती सुरक्षा टीम की निगरानी में अबू धाबी स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यूएई के अटॉर्नी-जनरल ने आतंकवादी साजिश या पूर्व नियोजित षड्यंत्र के एंगल से जांच के आदेश दिए हैं।
मुंबई के रहने वाले 39 वर्षीय कैप्टन स्मीत मच्छार के पास लगभग 9,750 घंटे की उड़ान का लंबा अनुभव है। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग न्यूजीलैंड से पूरी की थी और स्पाइसजेट में 11 साल तक काम करने के बाद जून 2022 में फ्लाईदुबई ज्वाइन किया था। उनकी इस असाधारण बहादुरी के लिए भारत और दुनिया भर के कई शीर्ष नेताओं ने उनकी सराहना की है।