भारतीय नौसेना का INS Kulish सिंगापुर पहुंचा, समुद्री सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

भारतीय नौसेना के ईस्टर्न फ्लीट की तैनाती के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए युद्धपोत INS Kulish सिंगापुर के तुआस टर्मिनल पहुंच गया है। 6 अक्टूबर को पहुंचे इस जहाज का मुख्य उद्देश्य 'ऑपरेशनल टर्नअराउंड' (OTR) है, जो न केवल तकनीकी जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि भारत और सिंगापुर के बीच गहरे होते रणनीतिक और समुद्री संबंधों को भी नई ऊंचाई देगा।
इस दौरे को दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान INS Kulish के कमांडिंग ऑफिसर सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा, वे क्रान्जी वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, जो दोनों देशों के बीच साझा ऐतिहासिक संबंधों की याद दिलाता है। यह पूरी यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'MAHASAGAR' विजन के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य एक सुरक्षित और समावेशी समुद्री वातावरण तैयार करना है।
क्षेत्रीय सहयोग और हालिया मिशन
INS Kulish की यह यात्रा केवल एक पोर्ट कॉल नहीं है, बल्कि यह हाल ही में संपन्न हुए कई बड़े सैन्य अभ्यासों का विस्तार है। इससे पहले, इस जहाज ने INS Sahyadri के साथ मिलकर फिलीपींस की सुबिक बे में 23वें ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) के विशेषज्ञों के कार्य समूह की गतिविधियों में हिस्सा लिया था।
इस दौरान भारतीय नौसेना ने कई जटिल समुद्री ऑपरेशन्स को अंजाम दिया, जिनमें शामिल थे:
- मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) और इंटेलिजेंस सर्विलांस।
- समुद्र में रसद आपूर्ति (Replenishment at Sea)।
- विजिट, बोर्ड, सर्च और सीजर (VBSS) ऑपरेशन्स।
- खोज और बचाव (Search and Rescue) अभियान।
नौसेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि इन गतिविधियों के दौरान भारतीय कर्मियों ने अन्य देशों के जहाजों, जैसे JS Ise और HMAS Perth, के साथ क्रॉस-डेक विजिट भी की। इन साझा अभ्यासों का मकसद अलग-अलग देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल और आपसी समझ को बढ़ाना है, ताकि भविष्य में किसी भी समुद्री चुनौती का मिलकर सामना किया जा सके।