भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस सुदर्शनी मिस्र के एलेक्जेंड्रिया बंदरगाह पहुँचा, जानिए लंबी यात्रा की खास बातें

भारतीय नौसेना का प्रसिद्ध पाल प्रशिक्षण जहाज INS Sudarshini अपनी लंबी समुद्री यात्रा के दौरान मिस्र के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर Alexandria पहुँच गया है। यह यात्रा Lokayan 26 ट्रांसओसैनिक अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत यह जहाज दूसरी बार इस बंदरगाह पर आया है। भारतीय नौसेना के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हमारे नाविकों को पारंपरिक समुद्री कौशल और लंबी दूरी की नेविगेशन में पूरी तरह से पारंगत करना है।
कोच्चि से शुरू हुई थी 10 महीने की लंबी यात्रा
इस जहाज ने अपनी 10 महीने की लंबी यात्रा की शुरुआत 20 जनवरी को केरल के Kochi बंदरगाह से की थी। योजना के अनुसार इस अभियान में INS Sudarshini को कुल 13 देशों के 18 बंदरगाहों का दौरा करना है और लगभग 22,000 समुद्री मील की दूरी तय करनी है। इस पूरी यात्रा के दौरान नौसेना के ट्रेनी कैडेट्स को खुले समुद्र में नौकायन, पाल संभालने और पारंपरिक नाविक तौर-तरीकों का बेहद करीब से व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
मिस्र के नौसेना अधिकारियों ने किया जोरदार स्वागत
जब यह जहाज एलेक्जेंड्रिया पहुँचा, तो वहाँ मिस्र की नौसेना के बड़े अधिकारियों और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने इसका भव्य स्वागत किया। एलेक्जेंड्रिया नेवल बेस के कमांडर Rear Admiral Mohamed Abdel Aziz ने खुद जहाज और उसके दल की अगवानी की। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी बातचीत, एक-दूसरे के जहाजों का दौरा करने और पेशेवर अनुभवों को साझा करने का मौका मिला, जिससे भारत और मिस्र के पुराने समुद्री संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं।
अरब सागर से लेकर अटलांटिक महासागर तक का सफर
अपनी इस अद्भुत यात्रा के दौरान इस तीन-मस्तूल वाले पोत ने कई महासागरों और समुद्रों को पार किया है। जहाज ने Arabian Sea, Red Sea और Mediterranean Sea से गुजरते हुए स्वेज नहर को पार किया और फ्रांस में हुए प्रतिष्ठित Escale à Sète मैरीटाइम फेस्टिवल में भी हिस्सा लिया। इसके बाद इस जहाज ने इतिहास रचते हुए पहली बार अटलांटिक महासागर को पार किया और केप वर्डे से 19 दिन की यात्रा के बाद 27 मई को एंटीगुआ पहुँचा।
इसी सफर के दौरान जहाज ने कोच्चि से रवाना होने के बाद 10,000 समुद्री मील की दूरी पूरी करने का बड़ा मील का पत्थर भी पार किया। इसके बाद जहाज ने पुर्तगाल और आजोरस की तरफ रुख किया और 22 अगस्त को लिस्बन पहुँचना सात महीनों के भीतर इसका 15वां बंदरगाह दौरा था।
वसुधैव कुटुंबकम का संदेश लेकर चल रहा है जहाज
यह पूरा अभियान भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत वह मित्र देशों के साथ दोस्ती, पेशेवर ट्रेनिंग और आपसी सहयोग को बढ़ावा देती है। यह जहाज भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का एक चलता-फिरता राजदूत बनकर दुनिया भर के समुद्रों में वसुधैव कुटुंबकम और MAHASAGAR की सोच का संदेश फैला रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक विज्ञप्ति को PIB India पर देखा जा सकता है।