ईरान और 11 देशों ने परमाणु केंद्रों पर हमलों की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का बड़ा उल्लंघन बताया
ईरान समेत 12 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में परमाणु केंद्रों पर सैन्य हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

न्यूयॉर्क: परमाणु केंद्रों पर होने वाले सैन्य हमलों के खिलाफ ईरान और 11 अन्य देशों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति के 81वें सत्र के दौरान इन देशों ने एक साझा बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी वाले परमाणु केंद्रों पर हमलों की कड़ी निंदा की है।
इस गठबंधन में ईरान के साथ बेलारूस, बुरुकिना फासो, चीन, क्यूबा, इरिट्रिया, निकारागुआ, नाइजर, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और जिम्बाब्वे शामिल हैं। इन देशों का कहना है कि ऐसे केंद्रों पर कोई भी सैन्य हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून, IAEA कानून और परमाणु हथियारों के अप्रसार संधि (NPT) का सीधा उल्लंघन है।
बयान में 1981 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 487 का हवाला दिया गया है, जो परमाणु केंद्रों पर सैन्य हमलों को प्रतिबंधित करता है। साथ ही NPT के अनुच्छेद IV पर जोर दिया गया है, जो देशों को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा हासिल करने के अधिकार की सुरक्षा करता है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि राजदूत गुलामहुसैन दरज़ी ने कहा कि ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का अटूट अधिकार है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि उन्होंने 2025 और 2026 के दौरान ईरानी परमाणु बुनियादी ढांचे के खिलाफ आक्रामक युद्ध छेड़े हैं।
इन 12 देशों ने IAEA के सभी सदस्य देशों से अपील की है कि वे ऐसे खतरों का स्पष्ट और जोरदार विरोध करें। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर चुप्पी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को कमजोर कर देगी।
इससे पहले 23 अक्टूबर 2026 को वियना में ईरान के स्थायी मिशन ने IAEA कानून की 70वीं वर्षगांठ पर एक बयान जारी किया था। उस समय ईरान ने एजेंसी पर दोहरे मानदंड अपनाने और ईरानी केंद्रों पर सैन्य हमलों के मामले में अस्वीकार्य चुप्पी साधने का आरोप लगाया था।
तेहरान ने मांग की है कि एजेंसी अपनी जिम्मेदारियों को चुनिंदा तरीके से लागू करना बंद करे और निष्पक्ष नीति अपनाए। साझा बयान में यह बात साफ की गई है कि ऐसे हमलों को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए और ईरान ने दोहराया कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।