ईरान ने बेंजामिन नेतन्याहू पर जेल जाने से बचने के लिए अमेरिका को युद्ध की ओर धकेलने का लगाया आरोप

बगदाद: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अराघची ने कहा कि नेतन्याहू अपनी कानूनी मुश्किलों से बचने के लिए अमेरिका को एक और युद्ध में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं।
अराघची ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखे बयान में चेतावनी दी कि ईरान के पास भी कुछ अधूरे काम बाकी हैं। उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
यह बयान तब आया जब ईरानी विदेश मंत्री बगदाद में ओआईसी (OIC) की 52वीं काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स की बैठक में हिस्सा ले रहे थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान दबाव और धमकी के खिलाफ है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में असुरक्षा के लिए अमेरिका और इजरायल के कदमों को जिम्मेदार ठहराया।
उसी दिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में एक तेल टैंकर समुद्री माइन से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई।
दूसरी तरफ, बेंजामिन नेतन्याहू भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 18 अक्टूबर 2026 को पीड़ित परिवारों ने उनके खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने 7 अक्टूबर की आपदा में अपनी भूमिका को लेकर जनता और राज्य नियंत्रक को गुमराह किया।
नेतन्याहू ने हाल ही में यह भी कहा कि वह 2020 के उस समझौते से अब बंधे नहीं हैं, जो उन्हें न्यायिक नियुक्तियों को प्रभावित करने से रोकता था। इजरायली अटॉर्नी जनरल ने इस कदम की आलोचना की है।
तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के दोबारा चुनाव लड़ने का समर्थन किया। ट्रंप ने उन्हें एक महान योद्धा प्रधानमंत्री बताया और कहा कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ काम पूरा कर सकता है।
जवाब में नेतन्याहू ने ईरानी शासन को खत्म करने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को इस लक्ष्य के लिए निर्देश दिए हैं और वह अमेरिकी मंजूरी के बिना भी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।
नेतन्याहू ने यह आरोप भी लगाया कि रूस ईरान की मदद कर रहा है और वैश्विक स्तर पर यहूदी विरोधी बॉट नेटवर्क चलाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहा है।
क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच खबरें हैं कि मिस्र सऊदी अरब की मदद के लिए अपनी सेना तैनात करने हेतु संसदीय मंजूरी मांग रहा है। यह कदम यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच उठाया जा रहा है। नेतन्याहू ने इन खतरों को 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनावों का मुख्य मुद्दा बनाया है।