अमेरिका की हमले की धमकी के बीच ईरान का दावा, युद्ध से पहले के मुकाबले अब ज्यादा मजबूत हुई एयर डिफेंस क्षमता

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमी-निया ने कहा है कि ईरान की हवाई रक्षा क्षमताएं युद्ध से पहले और युद्ध के समय के स्तर की तुलना में काफी बेहतर हो गई हैं।
प्रेस टीवी के मुताबिक, जनरल अकरमी-निया ने डोनाल्ड ट्रंप के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान की मौजूदा एयर डिफेंस क्षमताएं पिछले स्तरों से कहीं ज्यादा आगे निकल चुकी हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान पर नए हमलों की धमकी दे रहे हैं।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों को तैनात करने की जरूरत महसूस नहीं होती है।
ट्रंप ने बताया कि विचार किए जा रहे 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' (MOAB) के बारे में लोग गलत न समझें, क्योंकि यह परमाणु बम नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा पारंपरिक हथियार है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अमेरिकी सेना को हमले के और विकल्प तैयार करने का निर्देश दिया है। इसमें GBU-43/B यानी MOAB का इस्तेमाल शामिल हो सकता है, जिसे ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु केंद्रों, विशेष रूप से पिकैक्स माउंटेन स्थित संदिग्ध भूमिगत साइट को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, सैन्य योजना से जुड़े अधिकारियों ने सवाल उठाया है कि क्या MOAB गहराई में दबे ठिकानों के खिलाफ प्रभावी होगा। करीब 21,600 पाउंड वजन वाला यह बम अमेरिकी शस्त्रागार का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है, लेकिन इसे गहराई में घुसकर हमला करने के लिए नहीं बनाया गया है।
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पिछले हमलों ने ईरानी परमाणु केंद्रों को नुकसान पहुंचाया था।
इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 16 व्यक्तियों और 10 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर ईरान के वित्तीय नेटवर्क, शैडो बैंकिंग और सैन्य व क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग देने का आरोप है। इन प्रतिबंधों का लक्ष्य उन वित्तीय संस्थानों और तेल मध्यस्थों को रोकना है जो अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर और प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहे हैं।