बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन में ईरान और रूस का बड़ा ऐलान, अमेरिका के खिलाफ मिलकर काम करने का लिया संकल्प.

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ देखने को मिला है। 1 सितंबर 2026 को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच आमने-सामने की महत्वपूर्ण बैठक हुई। फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली सीधी मुलाकात थी। इस बैठक में दोनों देशों ने अमेरिकी मनमानी और एकतरफा फैसलों के खिलाफ मिलकर खड़े होने का कड़ा संकल्प लिया है।
रणनीतिक साझेदारी और अमेरिकी प्रतिबंधों पर चर्चा
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस मुश्किल समय में रूस के समर्थन के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि रूस ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा ईरान का साथ दिया है। पेजेशकियन ने तेहरान और मास्को के रिश्तों को रणनीतिक बताते हुए साफ कहा कि अमेरिका के पास अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने या किसी पर भी एकतरफा पाबंदियां थोपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि एससीओ जैसे बड़े मंचों के जरिए दोनों देश मिलकर अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को बेअसर कर देंगे।
जवाब में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ईरानी जनता के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाई। पुतिन ने वादा किया कि चल रहे राजनीतिक और सैन्य तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध पहले की तरह ही लगातार जारी रहेंगे। उन्होंने बताया कि उनकी व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि के तहत दोनों देशों के आपसी रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। इस सम्मेलन में संगठन की 25वीं वर्षगांठ भी मनाई गई, जहां सभी सदस्य देशों ने मिलकर 'बिश्केक घोषणापत्र' को अपनाया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान का समर्थन और चीन-भारत से बातचीत
बिश्केक घोषणापत्र में ईरानी धरती पर हुए सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की गई और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया गया। इसके अलावा, अमेरिका के एक हवाई हमले में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर भी गहरा शोक व्यक्त किया गया। इस घोषणापत्र में उन तमाम एकतरफा पाबंदियों का विरोध किया गया है जिनका मकसद देशों को दबाना होता है। इस पूरी घटना के बारे में आप विस्तार से यहाँ आधिकारिक जानकारी देख सकते हैं।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना और जिंस व्यापार को सुरक्षित रखना भी था। ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने इस ग्लोबल मंच का फायदा उठाते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अलग-अलग चर्चा की। उनकी इस बातचीत का मुख्य केंद्र आर्थिक सहयोग को बढ़ाना और अमेरिकी प्रतिबंधों से पड़ने वाले बुरे प्रभावों को कम करना था ताकि क्षेत्रीय व्यापार में किसी तरह की रुकावट न आए। इस बारे में अधिक जानकारी यहाँ दी गई रिपोर्ट से समझी जा सकती है।