BRICS Summit: ईरान और UAE के बीच रिश्ते सुधारने की बड़ी पहल, जानिए क्या हुई बात

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Leaders Summit के दौरान ईरान और यूएई के बीच एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने हिस्सा लिया। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन ने दोनों देशों के नेताओं को क्षेत्रीय स्थिरता और शांति पर चर्चा करने का एक बेहतरीन मौका दिया, खासकर तब जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था।
पुराने विवादों को पीछे छोड़ने का ऐलान
बैचतीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ किया कि ईरान और यूएई ने अपने पुराने आपसी मतभेदों और संघर्षों को पीछे छोड़ने का फैसला कर लिया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच एक बेहतर और साझा भविष्य के निर्माण पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान का यूएई या अपने किसी अन्य पड़ोसी देश के साथ कोई पुराना मनमुटाव नहीं है। हालांकि, उन्होंने क्षेत्रीय मामलों में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी का कड़ा विरोध जारी रखने की बात जरूर कही। याद दिला दें कि इससे पहले दोनों देशों के रिश्ते उस समय बहुत ज्यादा खराब हो गए थे जब ईरानी बलों ने यूएई की सीमा के अंदर अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसके बाद यूएई ने ईरान के साथ व्यापारिक और वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह से निलंबित कर दिया था।
मई के तनाव के बाद आई नरमी
दोनों देशों के बीच यह सुलह की कोशिश उस समय के हालात से बिल्कुल अलग है जो हमने इस साल मई में BRICS के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान देखे थे। उस बैठक में ईरान ने यूएई पर उसके सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसकी वजह से किसी भी साझा बयान पर सहमति नहीं बन पाई थी। लेकिन इस बार नई दिल्ली में स्थिति थोड़ी अलग रही और 12 सितंबर 2026 को हुई इस बैठक के बाद नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया। इस घोषणापत्र में पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में संयम बरतने, बातचीत के रास्ते अपनाने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर अपील की गई है। इसके अलावा, ईरानी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स देशों से एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग की और फिलिस्तीन के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन दोहराया।
आगे की कूटनीतिक तैयारियां
इस सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ईरानी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें मुख्य रूप से तनाव को कम करने और शांति बनाए रखने की रणनीतियों पर खुलकर चर्चा हुई। भारत की 2026 की अध्यक्षता ने क्षेत्रीय संवाद के लिए एक मजबूत मंच प्रदान किया है। इस कूटनीतिक सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अब ईरान, इराक और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के प्रतिनिधि आगामी 14 सितंबर को ओमान में एक बैठक करने वाले हैं। इस आगामी बैठक का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय पारगमन सुरक्षा, विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़े सुरक्षा मामलों पर चर्चा करना होगा, ताकि खाड़ी देशों और वहां काम करने वाले प्रवासियों के लिए आवागमन सुरक्षित हो सके।