सऊदी अरब और ईरान के रिश्तों में बढ़ी तकरार, खाड़ी देशों में मंडराया बड़ा खतरा.

खाड़ी देशों में एक बार फिर से तनाव का माहौल बहुत ज्यादा बढ़ गया है और इस बात को लेकर कई तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं। Al Jazeera अंग्रेजी के लिए लिखने वाली Nafja Sabbah Al-Kuwari ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का बड़ा खुलासा किया है कि ईरान और उसके पड़ोसी अरब खाड़ी देशों के बीच के रिश्ते अब बहुत ज्यादा नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। इस रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि क्या तेहरान अपनी उस नीति के साथ शांति से रह सकता है, जिससे आसपास के देशों की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा होता है। साल 2023 में चीन की मध्यस्थता से सऊदी अरब और ईरान के बीच जो समझौता हुआ था, अब उस पर भी खतरा मंडराने लगा है क्योंकि क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सैनिक कार्रवाई और कड़े फैसले
हाल ही में हुई सैन्य घटनाओं ने कूटनीतिक रिश्तों को और ज्यादा बिगाड़ दिया है। सीधे हमलों के बाद सऊदी अरब ने अपने यहां से ईरान के मिलिट्री अताशे और चार दूतावास कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके अलावा, ओमान में होने वाली वे बैठकें भी टाल दी गईं जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को बेहतर तरीके से चलाने पर चर्चा होनी थी। वर्तमान सुरक्षा स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो चुकी है कि इस रास्ते से गुजरने वाला जहाजी ट्रैफिक संघर्ष से पहले के मुकाबले केवल 10 प्रतिशत यानी 90% तक नीचे गिर गया है। गत 16 सितंबर को इस जलडमरूमध्य के पास एक अज्ञात वस्तु या प्रक्षेपास्त्र से एक तेल टैंकर पर हमला किया गया था। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने एक टोगो-झंडे वाले तेल टैंकर पर अवैध रूप से गुजरने का आरोप लगाते हुए उस पर हमला करने की बात स्वीकार की, जिससे उसमें भयंकर आग लग गई थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल और हथियार सौदे
इस पूरे मामले में दुनिया भर के बड़े देशों की दखलअंदाजी भी लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस संघर्ष को लेकर कहा कि उनके सामने एक बड़ा फैसला लेने की स्थिति है और वे अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में खाड़ी देशों के नेताओं के साथ मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब की रक्षा को मजबूत करने के लिए $24.3 billion यानी 24.3 अरब डॉलर की भारी-भरकम कीमत पर 48 F-35 Lightning II विमानों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। इसके विपरीत, रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदियों की निगरानी को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने यह माना कि ईरान पर हुए दो अमेरिकी हमलों के दौरान युद्ध अपराध होने के पर्याप्त आधार मौजूद थे।
दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान और घरेलू गतिविधियां
अन्य देशों की बात करें तो दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung ने यह घोषणा की कि उनका देश इस सैन्य संघर्ष में अपनी सेना को नहीं भेजेगा, लेकिन वे अदन की खाड़ी में अपनी नौसेना के अभियानों को बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता जता दी है। अगर घरेलू मोर्चे की बात करें तो 17 सितंबर को इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल Security की एक रिपोर्ट में यह सामने आया कि ईरान अपने तालेघान 2 परमाणु सुविधा केंद्र को बहुत तेजी से फिर से बना रहा है। इन तमाम घटनाओं के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक स्वीडिश राजनयिक को बुलाया और बाद में उन्हें देश छोड़ने का आदेश दे दिया, क्योंकि स्वीडन ने उन समूहों को अपने यहां शरण दी थी जो ईरान के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से वहां आने-जाने वाले लोगों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बनती जा रही है क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था में लगातार बदलाव आ रहे हैं।