ईरान के विदेश मंत्री अराघची बोले: युद्ध में पर्यावरण भी पीड़ित, इकोसाइड अपराध घोषित हो

तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को कहा कि अब पर्यावरण को युद्ध का चुपचाप सहने वाला शिकार मानकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। तेहरान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'इकोसाइड: एक खामोश युद्ध अपराध' को संबोधित करते हुए उन्होंने अमेरिका और इज़राइल के सैन्य हमलों से हुए नुकसान पर खुलकर बात की।
अराघची के मुताबिक ईरान के तेल, रिफाइनरी और ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों से गंभीर पर्यावरणीय खतरे पैदा हुए हैं। उन्होंने इसे मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया।
मार्च की आग और ज़हरीले रसायन
उन्होंने बताया कि मार्च 2026 में हुए हमलों के बाद लगी आग से खतरनाक रासायनिक तत्व हवा, मिट्टी और पानी में फैल गए। इसका असर खाद्य श्रृंखला पर सालों तक पड़ सकता है। अराघची ने तेहरान के आसपास के इलाकों से जुड़े आंकड़ों का हवाला भी दिया, जो संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की ओर से सामने आए थे।
उन्होंने यह भी कहा कि गाज़ा में पानी और सीवेज व्यवस्था ढह चुकी है और तटीय इलाकों में प्रदूषण फैल रहा है। लेबनान में आगजनी वाले हथियारों के इस्तेमाल से जंगल और खेती की ज़मीन बर्बाद होने का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।
अराघची ने चेतावनी दी कि युद्ध के दौरान होने वाला पर्यावरणीय नुकसान आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों की सेहत पर लंबे समय तक असर डालता है। इसलिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही की मांग की और ईकोसिस्टम की रक्षा में दोहरे मापदंड खत्म करने पर ज़ोर दिया।
उन्होंने वैश्विक समुदाय से 'इकोसाइड' को एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया। इसके फ़ारसी समकक्ष के तौर पर उन्होंने 'प्रकृति-हत्या' शब्द सुझाया।
इन समस्याओं से निपटने के लिए अराघची ने मज़बूत कानूनी ढांचा बनाने और युद्ध से हुए पर्यावरणीय विनाश का दस्तावेज़ीकरण करने के लिए निष्पक्ष वैज्ञानिक तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा। मुआवज़े की व्यवस्था की बात भी उन्होंने की। उनका कहना था कि ईकोसिस्टम की बहाली के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ज़रूरी है। उन्होंने आगामी COP31 शिखर सम्मेलन को सैन्य आक्रामकता के पर्यावरणीय असर को सामने लाने का अहम मंच बताया।