ईरान का बड़ा ऐलान, होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद, अमेरिका ने ठुकराया प्रस्ताव.

फारस की खाड़ी के पास तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और ताजा घटनाक्रम में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। ईरानी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ और डिप्टी कोऑर्डिनेटर रियर एडमिरल हबीबुल्लाह सयारी ने 28 सितंबर 2026 को यह ऐलान किया कि यह जलमार्ग पूरी तरह से बंद है और इस्लामिक गणराज्य के नियंत्रण में है। उन्होंने साफ कहा कि इस इलाके और इसके प्रवेश द्वारों को ईरानी क्षेत्र माना जाता है, जिस पर देश की पूरी पकड़ है। इस घोषणा के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है और दुनिया भर के देशों की इस पर कड़ी नजर है।
रणनीतिक नियंत्रण और सैन्य तैनाती
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस सामरिक क्षेत्र की सुरक्षा और नियंत्रण को दो हिस्सों में बांटा गया है। फारस की खाड़ी के पास पश्चिमी हिस्से और जलमार्ग की निगरानी की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्स (IRGC) की नौसेना के पास है। वहीं दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से और उत्तरी हिंद महासागर की सुरक्षा का जिम्मा सेना की नौसेना संभाल रही है। ईरानी सेना का कहना है कि वे उत्तरी ओमान सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में पूरी ताकत से काम कर रहे हैं और किसी भी बाहरी खतरे से निपटने के लिए अपनी ऑपरेशनल तैयारी को काफी ज्यादा बढ़ा चुके हैं।
राजनैतिक बयान और अमेरिका का कड़ा रुख
इससे पहले 27 सितंबर 2026 को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची ने कहा था कि इस रास्ते को दोबारा खोलने की बात केवल तभी हो सकती है जब ईरान की कुछ खास शर्तों को माना जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश बातचीत के लिए तैयार है लेकिन अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। इसके अलावा देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी 28 सितंबर 2026 को देश की एकता पर जोर देते हुए अपने रुख को स्पष्ट किया था। दूसरी तरफ, अमेरिका ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि ईरान का इस जलमार्ग पर कोई अधिकार या सैन्य दबदबा नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की तरफ से आए उस सात दिन के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया जिसमें जलमार्ग खोलने और परमाणु समझौते पर फिर से चर्चा की बात कही गई थी। अमेरिका का मानना है कि यह फैसला ईरान की आर्थिक लाचारी को साफ दिखाता है।