Strait of Hormuz: ईरान को अमेरिका से औपचारिक जवाब का इंतज़ार, 7 दिन के प्रस्ताव पर फंसा पेंच.

फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि उसे अमेरिका की तरफ से अभी तक किसी भी प्रकार का औपचारिक जवाब नहीं मिला है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने मीडिया को जानकारी दी कि तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की प्रतिक्रिया के बारे में सुन लिया है, लेकिन मध्यस्थों के जरिए कोई आधिकारिक संदेश हाथ नहीं लगा है। यह पूरा मामला रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को फिर से खोलने और संघर्ष को थामने से जुड़ा हुआ है, जिस पर पिछले कुछ दिनों से लगातार कूटनीतिक बातचीत चल रही है।
क्या है सात दिन का डी-एस्केलेशन प्रस्ताव?
यह व्यापक प्रस्ताव न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान पेश किया गया था। इस रोडमैप के तहत कई कड़ी शर्तें रखी गई हैं ताकि क्षेत्र में शांति बहाली की जा सके। शर्तों में लेबनान तक पूर्ण युद्धविराम, ईरान की 12 अरब डॉलर से अधिक की फ्रोजन संपत्ति को जारी करना, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटाना और ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों से छूट देना शामिल है। इस योजना के अनुसार, यदि सब कुछ ठीक रहता है तो छठे दिन इस रास्ते को फिर से खोल दिया जाएगा और सातवें दिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की बातचीत शुरू की जाएगी।
अमेरिका और ईरान के रुख में अंतर
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शनिवार, 26 सितंबर 2026 को इस प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया था। उन्होंने इस डील को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और सोशल मीडिया पर यह सुझाव भी दिया कि इस जलडमरूमध्य का नाम बदलकर Trump Strait रख दिया जाना चाहिए। हालांकि ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने इस शांति योजना का समर्थन किया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का रुख अभी भी काफी सख्त और संशय से भरा हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और दूत Steve Witkoff इस बात की आशंका जता रहे हैं कि अमेरिकी मध्यावर्ती चुनावों के बाद स्थिति में और अधिक तनाव आ सकता है।
मध्यस्थों की भूमिका और खाड़ी देशों की चिंता
इस अप्रत्यक्ष कूटनीतिक प्रयास में कतर की भूमिका सबसे अहम रही है। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman bin Jassim Al Thani दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा ओमान की तरफ से भी समुद्री कूटनीति में पूरा सहयोग मिल रहा है। इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में देख सकते हैं। खाड़ी देशों में बढ़ते इस गतिरोध से उन तमाम प्रवासियों और कामगारों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं जो इन इलाकों में रहकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।