लेबनान में इसराइली हमलों के लिए ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को ठहराया जिम्मेदार, अमेरिका पर भी साधा निशाना।

लेबनान में चल रही इसराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है और इस मामले में ईरान ने सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को जिम्मेदार ठहराया है। 9 सितंबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से इस बात की कड़ी निंदा की और कहा कि सुरक्षा परिषद की लगातार खामोशी और inaction के कारण ही यह संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही से संयुक्त राष्ट्र की साख पर बड़ा सवाल खड़ा होता है और इससे इसराइल को क्षेत्रीय सैन्य अभियानों को और अधिक फैलाने का मौका मिल रहा है। इस बीच, तेहरान ने अमेरिका को इन सभी गतिविधियों में मुख्य साझेदार बताया है और खुली मदद मिलने का हवाला देते हुए अमेरिका को भी इसके लिए जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स ने रखी शर्तें
दूसरी तरफ, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC के प्रवक्ता Hossein Mohebi ने वर्तमान संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपनी औपचारिक शर्तें सबके सामने रखी हैं। इन शर्तों के तहत सबसे मुख्य मांग यह है कि इसराइली सेना को लेबनान की धरती से तुरंत और पूरी तरह से वापस जाना होगा। इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC से यह अपील की है कि वह इस आक्रामकता को रोकने के लिए तुरंत और कड़े कदम उठाए, ताकि गुनहगारों को उनकी करनी की सजा मिल सके और इलाके में शांति बहाल हो सके।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चिंता और यूएनएससी प्रस्ताव 1701
ये सभी बड़े घटनाक्रम 8 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres द्वारा दिए गए उस बयान के बाद सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने लेबनान और खासतौर पर नबातिएह के आसपास के इलाकों में इसराइली सैन्य कार्रवाइयों के तेज होने पर गहरी चिंता जताई थी। महासचिव ने महिलाओं और बच्चों समेत लगातार बढ़ रहे नागरिकों के नुकसान और निकासी के आदेशों की वजह से हुई भारी तबाही की कड़े शब्दों में निंदा की थी। उन्होंने तुरंत युद्ध रोकने और UNSC Resolution 1701 का पालन करते हुए इसराइल से अपनी सेना वापस बुलाने की बात कही थी, ताकि आम नागरिकों और बुनियादी ढांचों की सुरक्षा को पूरी तरह से सुनिश्चित किया जा सके।