ईरान का आरोप: अमेरिका परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा

ईरान के विदेश मंत्रालय ने परमाणु केंद्रों पर हमले की धमकी देने वाले अमेरिका को वैश्विक परमाणु अप्रसार शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।

Gautam Sahu2 November 20262 min read0 viewsWorld
ईरान का आरोप: अमेरिका परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा

तेहरान: ईरान ने परमाणु केंद्रों को निशाना बनाने की अमेरिकी धमकियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने सोमवार को अमेरिका को वैश्विक परमाणु अप्रसार शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।

एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बगाएई ने कहा कि किसी देश के खिलाफ धमकी देना और विशेष हथियारों के इस्तेमाल का संकेत देना, परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के उल्लंघन को बढ़ावा देने जैसा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) जैसी संस्थाओं की चुप्पी पर दुख जताया और चेतावनी दी कि वाशिंगटन एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय मिसाल कायम कर रहा है।

बगाएई ने जोर देकर कहा कि उनके खिलाफ दी जा रही धमकियां ईरान को अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए प्रेरित करेंगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या सैन्य धमकियों के जवाब में ईरान अपने परमाणु सिद्धांत में बदलाव करेगा, तो उन्होंने इसे सालों के अमेरिकी दबाव और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े लोगों की लक्षित हत्याओं की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बताया।

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प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है और इसे कई बार साबित किया जा चुका है। उन्होंने अमेरिका पर 20 साल पुराने झूठ को दोहराने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल संधि को लेकर तेहरान का आधिकारिक रुख नहीं बदला है और वह NPT का सदस्य होने के नाते अपनी प्रतिबद्धताओं से बंधा है।

IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी द्वारा परमाणु स्थलों के तत्काल निरीक्षण की मांग को खारिज करते हुए बगाएई ने एजेंसी पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एजेंसी ने ईरान के बुनियादी ढांचे पर हुए पिछले हमलों की निंदा नहीं की है। बगाएई के मुताबिक, महानिदेशक पर ईरान का काफी कर्ज है और उन्हें भविष्य की बात करने से पहले पुराने हिसाब चुकता करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि एजेंसी की विश्वसनीयता तब कम हो गई जब उसने ईरान के परमाणु केंद्रों पर अमेरिका और 'ज़ायोनिस्ट शासन' के अवैध हमलों के खिलाफ कोई रुख नहीं अपनाया। उन्होंने साफ किया कि भविष्य के परमाणु कदमों पर कोई भी बातचीत केवल तभी होगी जब अमेरिका मध्यस्थता के जरिए ईरान की शुरुआती मांगों को पूरा करेगा।

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव किया है। आयोवा में एक रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पर ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए यह एक बहुत छोटी कीमत है।

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