BRICS बैठक में ईरान की मांग, सदस्य देश युद्ध अपराधों के खिलाफ उठाएं सख्त कदम और करें कार्रवाई.

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Judicial Chiefs की बैठक के दौरान ईरान के न्यायपालिका प्रमुख غلامحسین محسنی اژهای (Gholam-Hossein Mohseni-Ejei) ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सभी सदस्य देशों से यह अपील की है कि वे ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की खुलकर निंदा करें। संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों को ईरान से जुड़े दो हालिया संघर्षों के दौरान कथित युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। इस सम्मेलन में भारत के अलावा ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हुए थे, जिनके सामने यह गंभीर मुद्दा उठाया गया।
कूटनीतिक बैठकें और कानूनी सहयोग
भारत के दौरे पर आए ईरानी न्यायपालिका प्रमुख ने सम्मेलन के इतर कई बड़े देशों के उच्च अधिकारियों के साथ अहम द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। चीन के सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट के अध्यक्ष Zhang Jun के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच रणनीतिक न्यायिक सहयोग को मजबूत करने और कानूनी प्रणालियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने रूस के सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख Igor Krasnov से भी मुलाकात की, जिन्होंने मौजूदा बाहरी दबाव और प्रतिबंधों के बीच तेहरान को समर्थन देने की बात दोहराई। बेलारूस के सुप्रीम कोर्ट के चेयरमैन Andrei Shved के साथ भी डिजिटल तकनीक और न्यायिक सहयोग को लेकर बातचीत की गई।
अमेरिका और इजरायल पर साधा निशाना
सम्मेलन के दौरान ईरानी अधिकारी ने यह भी दोहराया कि इस साल उनके देश को अमेरिका की तरफ से अवैध हमलों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इतनी मुश्किलों के बावजूद देश ने अपनी रणनीतिक लचीलेपन से स्थिरता बनाए रखी है। क्षेत्रीय तनाव तब और बढ़ गया जब 5 सितंबर 2026 को यह खबर सामने आई कि खाड़ी क्षेत्र में खार्ग द्वीप के पास एक ईरानी टैंकर को निशाना बनाया गया। इस बीच, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने अमेरिकी नागरिकों को संभावित बड़े संघर्ष में शामिल होने के खिलाफ चेतावनी दी और आरोप लगाया कि यह सब इजरायली हितों के कारण हो रहा है। इससे पहले मई 2026 में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भी ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच के संघर्ष पर असहमति के कारण कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया था।