मध्य पूर्व में तनाव के बीच ईरान ने की क्षेत्रीय बातचीत की मांग, पाकिस्तान और ब्रिक्स से की अपील.

Nura Basta9 September 20263 min read26 viewsWorld
मध्य पूर्व में तनाव के बीच ईरान ने की क्षेत्रीय बातचीत की मांग, पाकिस्तान और ब्रिक्स से की अपील.

क्षेत्रीय स्तर पर लगातार बढ़ते तनाव और सैन्य टकराव के बीच ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा बयान जारी किया है। 9 सितंबर 2026 को समाप्त हुए पिछले चौबीस घंटों में भारी सैन्य और राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जिसके बाद ईरान ने क्षेत्रीय देशों के साथ बातचीत और सहयोग के लिए अपनी पूरी तैयारी आधिकारिक रूप से घोषित कर दी है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक इसका मुख्य उद्देश्य आपसी विश्वास को बढ़ावा देना, स्थायी सुरक्षा हासिल करना और आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ाना है। इस बीच खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए भी हालात पर नजर रखना जरूरी हो गया है, क्योंकि इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

ईरान और पाकिस्तान के बीच बातचीत और ब्रिक्स की भूमिका

ईरान के विदेश मंत्री अब्‍बास अरागची ने इस बात पर जोर दिया है कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए इस्लामाबाद के साथ लगातार परामर्श करना बहुत जरूरी है। उन्होंने मध्यस्थता में पाकिस्तान की रचनात्मक भूमिका की भी औपचारिक रूप से सराहना की है। इसके साथ ही, अरागची ने BRICS गठबंधन से वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करने में अधिक मजबूत भूमिका निभाने का आग्रह किया है। हालांकि, हाल ही में हुई ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संकट को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन पाई, क्योंकि कुछ सदस्यों ने, जिनमें कथित तौर पर UAE भी शामिल था, अमेरिका और इजरायल केactions की स्पष्ट रूप से निंदा करने का विरोध किया था।

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तेल टैंकरों पर हमला और सैन्य कार्रवाई

ईरानी मंत्रालय ने 8 सितंबर को अपने तेल टैंकरों पर अमेरिकी आतंकवादी सेना द्वारा किए गए आक्रामक हमले की कड़ी निंदा की है। ईरान का कहना है कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन है। इसके जवाब में ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रक्षात्मक हमले किए। जॉर्डन के अधिकारियों ने पुष्टि की कि उनके सुरक्षा बलों ने ईरान से दागी गई 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया। इस घटना के बाद सऊदी अरब ने औपचारिक रूप से जॉर्डन पर हुए हमलों की निंदा की है और शत्रुता को तुरंत रोकने की मांग की है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री प्रतिबंध

हालिया हमलों में ईरान के ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक सीधे तौर पर इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बना रहे हैं, जो अमेरिकी बलों द्वारा पांच ईरानी तेल टैंकरों को डुबोए जाने के बाद शुरू हुए। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों से जुड़े संघर्ष की भी रिपोर्ट दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चाबहार से लेकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों तक एक समुद्री प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। इन घटनाओं के बीच ईरानी विदेश मंत्रालय ने अबू मूसा, ग्रेटर टंब और लेसर टंब द्वीपों पर अपनी संप्रभुता को फिर से दोहराया है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रतिबंध

प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि लेबनान में संघर्ष का अंत होना किसी भी अमेरिका-ईरान समझौते के लिए पहली शर्त है और ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों से स्वतंत्र होकर अपनी जमी हुई संपत्तियों का प्रबंधन करेगा। कतर का विदेश मंत्रालय अपनी कूटनीतिक कोशिशों के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के फिर से खोलने पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हथियारों और अवैध सामान को ले जाने में उनकी कथित भूमिका का हवाला देते हुए 27 एयरलाइंस सहित 36 संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने ईरान द्वारा आईएईए (IAEA) के सहयोग को निलंबित किए जाने पर गहरी चिंता जताई है, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि 'पिकऐक्स माउंटेन' साइट पर निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है, जहां एक गुप्त परमाणु सुविधा होने का संदेह जताया जा रहा है।

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