अमेरिकी विमानों के नुकसान पर ईरान का बड़ा दावा, CRS रिपोर्ट के आंकड़ों को बताया अधूरा

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने अमेरिकी सैन्य विमानों के नुकसान को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। अरगची का कहना है कि अमेरिका ने अपनी हालिया रिपोर्ट में जो आंकड़े पेश किए हैं, असलियत उससे कहीं ज्यादा गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ अभियानों में अमेरिका के जितने विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक है।
दरअसल, यह पूरा मामला अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) की एक रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसका शीर्षक "ऑपरेशन एपिक फ्युरी में अमेरिकी विमानों का मुकाबला नुकसान" है। 5 अक्टूबर 2026 को अपडेट की गई इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अभियानों में अमेरिका के 81 विमान या तो नष्ट हुए हैं या उन्हें भारी नुकसान पहुँचा है। विदेश मंत्री अरगची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इन आंकड़ों पर सवाल उठाए और कहा कि वास्तविक टोल बहुत अधिक है।
अमेरिकी सैन्य पारदर्शिता पर उठाए सवाल
अरगची ने केवल आंकड़ों पर ही बात नहीं की, बल्कि अमेरिकी सेना की पारदर्शिता पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक मौजूदा सीनेटर को उन सैन्य ठिकानों का निरीक्षण करने से रोका है, जिन्हें ऑपरेशनल घोषित किया गया था। ईरान का मानना है कि अमेरिका अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रहा है।
अगर CRS की रिपोर्ट पर नजर डालें, तो मई में नुकसान की संख्या 42 थी, जो अक्टूबर तक बढ़कर 81 हो गई। इस नुकसान में शामिल हैं:
- 45 MQ-9 रीपर ड्रोन और 3 MQ-1 मल्टी-रोल क्राफ्ट
- 12 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर्स और एक F-35A लाइटनिंग II
- 7 KC-135 स्ट्रैटोटैंकर रिफ्यूलिंग विमान और एक E-3 सेंट्री
- दो A-10 थंडरबोल्ट II और सात सैन्य हेलीकॉप्टर
- एक MQ-4C ट्राइटन और दो MC-130J स्पेशल ऑपरेशंस ट्रांसपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, इन विमानों की मरम्मत और उन्हें बदलने की अनुमानित लागत लगभग 3.3 बिलियन डॉलर है। वहीं, अगर पूरे संघर्ष की बात करें, तो 3 सितंबर 2026 तक इसकी कुल लागत 43.6 बिलियन डॉलर तक पहुँच गई है, जिसमें से 28.1 बिलियन डॉलर केवल गोला-बारूद पर खर्च हुए हैं। हालांकि, CRS ने यह भी जोड़ा है कि कुछ क्षतिग्रस्त विमानों को दोबारा सेवा में लाया गया होगा और युद्ध की स्थिति को देखते हुए इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।