हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी ड्रोन ज़ब्त करने का ईरान का दावा, वाशिंगटन ने किया खारिज।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने रविवार को यह दावा किया कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज में एक और अमरीकी पानी के अंदर चलने वाले ड्रोन को पकड़ लिया है। इस घटना के बाद से खाड़ी देशों में एक बार फिर से तनाव का माहौल बन गया है और आम लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। ईरान का कहना है कि यह एक आधुनिक और महंगा उपकरण था जो समुद्र के नीचे की गतिविधियों पर नजर रखता था, जबकि अमरीकी सेना ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
अमरीकी सेना का कड़ा बयान और स्थिति
अमरीकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने अल जज़ीरा से बात करते हुए ईरान के इस दावे को पूरी तरह से गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि अमरीका का कोई भी ड्रोन गायब नहीं है और उनके सभी उपकरण सुरक्षित और अपनी जगह पर मौजूद हैं। इससे पहले सितंबर महीने में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई थी जिसे पेंटगन ने एक सामान्य सर्वे करने वाला ड्रोन बताया था जो किसी भी तरह की गोपनीय जानकारी जुटाने में काम नहीं आ रहा था।
क्षेत्रीय सुरक्षा और खाड़ी देशों पर असर
खाड़ी देशों में पिछले सात महीनों से लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है, जिससे आम जनजीवन और वहां रहने वाले प्रवासियों पर भी असर पड़ रहा है। यूएई, बहरीन, कतार, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों के पास लगातार मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों की खबरें आ रही हैं। यूएई की डिफेंस फोर्स को कई बार अलर्ट रहना पड़ा है, बहरीन में लगातार सायरन बजने की खबरें आई हैं और कतार ने भी कई बार आसमान में आने वाले खतरों को रोका है। इस इलाके में भारत, पाकिस्तान, फिलीपींस, बांग्लादेश और मिस्र के लाखों लोग नौकरी और व्यापार के सिलसिले में रहते हैं, जिन्हें ऐसी घटनाओं की वजह से सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना पड़ रहा है।
राजनयिक प्रयास और बातचीत की उम्मीद
तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशें भी जारी हैं। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को यह उम्मीद जताई कि इस हफ्ते ईरान के साथ बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू हो सकता है। हालांकि, अमरीका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के संबंध में ईरान के सात दिन के प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। ईरान और अमरीका के बीच कतर के माध्यम से बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस रास्ते से होने वाले तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर से संकट के बादल छट सकें।