तेहरान में ईरान ने बंद किया फ्रांसीसी भाषा केंद्र, न्यायिक आदेश के बाद हुई बड़ी कार्रवाई.

तेहरान में ईरानी अधिकारियों ने फ्रांसीसी दूतावास से जुड़े एक प्रमुख भाषा केंद्र को बंद कर दिया है। यह कार्रवाई 20 सितंबर 2026 को तेहरान अभियोजक कार्यालय के एक न्यायिक आदेश के बाद की गई। जिस संस्थान को बंद किया गया है, उसे Centre de Langue Française या भाषा और संस्कृति केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस कदम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और अधिक बढ़ गया है, जिसे लेकर आम लोगों और बाहर से आने वाले नागरिकों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है।
बिना लाइसेंस चलने का लगा आरोप
ईरानी न्यायपालिका की Mizan समाचार एजेंसी और अर्ध-सरकारी Tasnim समाचार एजेंसी के अनुसार, तेहरान अभियोजक कार्यालय ने यह आरोप लगाया कि यह केंद्र बिना किसी जरूरी कानूनी लाइसेंस के पिछले कई सालों से चल रहा था। अधिकारियों का कहना है कि संस्थान को नियमों का पालन करने के लिए कई बार चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन निर्देशों का सही से पालन नहीं किया गया। इसके बाद प्रशासन को यह सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
संस्कृति और सुरक्षा को खतरा बताने का दावा
अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट्स में यह भी कहा कि इस भाषा केंद्र का इस्तेमाल पढ़ाई की आड़ में ऐसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था जो देश की संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ थीं। प्रशासन का यह भी आरोप है कि यह केंद्र कुशल ईरानी नागरिकों को देश छोड़कर बाहर जाने में मदद करने वाले नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा था। इस संस्थान में सितंबर महीने में होने वाली टीसीएफ (TCF) और डेल्फ़-डल्फ़ (DELF-DALF) जैसी अंतरराष्ट्रीय दक्षता परीक्षाओं और फ्रेंच भाषा के कोर्स के लिए तैयारियां और प्रचार जोरों पर चल रहा था, तभी यह अचानक कार्रवाई कर दी गई।
विदेशियों पर कड़ी नजर और नए नियम
यह पूरी घटना तेहरान और पेरिस के बीच पहले से खराब चल रहे रिश्तों के बीच सामने आई है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच राजनयिकों की हिरासत और जासूसी के मामलों को लेकर तनाव देखा गया था। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कदम विदेशी संपर्कों और खुफिया घुसपैठ पर रोक लगाने के लिए जरूरी हैं। इसी दिन ईरानी संसद ने विदेशी संचार पर नजर रखने के लिए नए उपायों को भी मंजूरी दी, जिसके तहत गृह मंत्रालय को एक ऑनलाइन पंजीकरण और निगरानी प्रणाली स्थापित करनी होगी। साथ ही खुफिया मंत्रालय और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स को पूरी निगरानी की ताकत दी गई है ताकि देश में बाहरी प्रभावों पर कड़ी नजर रखी जा सके।