तीन द्वीपों पर दावे को लेकर ईरान ने कनाडा और यूएई की कड़ी निंदा की

अबू मूसा और तुम्ब द्वीपों पर दावे को लेकर ईरान ने यूएई और कनाडा की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इन दावों को बेतुका बताया है।

Gautam Sahu31 October 20262 min read0 viewsWorld
तीन द्वीपों पर दावे को लेकर ईरान ने कनाडा और यूएई की कड़ी निंदा की

तेहरान: फारस की खाड़ी में स्थित तीन द्वीपों पर संप्रभुता के दावों को लेकर ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कनाडा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूएई के दावों की औपचारिक रूप से निंदा की है और कनाडा द्वारा दिए गए समर्थन को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है।

विवाद की शुरुआत 28 अक्टूबर 2026 को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान द्वारा जारी एक संयुक्त बयान से हुई। इस बयान में कनाडा ने यूएई के रुख का खुला समर्थन किया और इन क्षेत्रों के 'कब्जे' को खत्म करने की मांग की।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने 31 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। बगाएई ने यूएई के क्षेत्रीय दावों को 'बेतुका' करार दिया और कनाडा के समर्थन को 'अदूरदर्शी' बताते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया।

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बगाएई ने जोर देकर कहा कि अबू मूसा, ग्रेटर तुम्ब और लेसर तुम्ब द्वीप हजारों वर्षों से ईरान का अभिन्न अंग रहे हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक तथ्य की तुलना 1971 में यूएई के गठन से करते हुए कनाडा की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।

ईरान ने कनाडा के चयनात्मक रुख पर हमला करते हुए 1812 के युद्ध और 1849 के मॉन्ट्रियल एनेक्सेशन मेनिफेस्टो जैसे ऐतिहासिक उदाहरण दिए। साथ ही, बगाएई ने कनाडा के संभावित अमेरिकी विलय के संबंध में डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों का भी जिक्र किया।

ब्रिटिश सेना की वापसी के बाद 30 नवंबर 1971 से ये तीनों द्वीप ईरानी नियंत्रण में हैं। जहां यूएई इन्हें अपनी संप्रभुता का केंद्रीय हिस्सा बताता है, वहीं ईरान का कहना है कि उसका नियंत्रण ऐतिहासिक रूप से स्थापित है और इस पर कोई बातचीत नहीं होगी।

इस राजनयिक विवाद से पहले यूरोपीय संघ ने भी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अपील की थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पक्षों की भागीदारी के साथ तनाव अब और बढ़ गया है।

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