ईरान ने लarak द्वीप पर अमेरिकी हमलों को बताया आक्रामकता, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में की औपचारिक शिकायत.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने हाल ही में लarak द्वीप पर हुए अमेरिकी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे खुली आक्रामकता करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई यह सैन्य कार्रवाई यह साबित करती है कि वाशिंगटन लगातार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है। इस पूरी घटना के बाद ईरान ने अपनी रक्षा करने और कड़ा जवाब देने के अपने अधिकार को पूरी तरह से वैध बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस गंभीर मामले की आधिकारिक शिकायत 1 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दर्ज करा दी है।
अमेरिकी केंद्रीय कमान का बयान और हुई कार्रवाई
दूसरी ओर, यूएस सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पुष्टि की कि 30 अगस्त 2026 को अमेरिकी बलों ने लarak द्वीप पर दो ईरानी रॉकेट लॉन्चरों के खिलाफ सीमित और सटीक हमले किए थे। CENTCOM के प्रवक्ता कप्तान Tim Hawkins ने जानकारी दी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को इस क्षेत्र में रॉकेट लॉन्च करने और समुद्र में बारूदी सुरंगे यानी सी माइन्स बिछाने की तैयारी करते हुए देखा गया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, इन हमलों में दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग घायल हो गए। इससे पहले 28 अगस्त 2026 को CENTCOM के कमांडर एडमिरल Brad Cooper ने घोषणा की थी कि अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के शिपिंग लेन से सभी सी माइन्स को सफलतापूर्वक हटा दिया है।
ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय तनाव
इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में IRGC ने दावा किया कि उसने 30 अगस्त 2026 को जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं और भविष्य में और अधिक विनाशकारी जवाब देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 31 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि अमेरिका अमेरिकी बलों पर हुए इन हमलों का कड़ा जवाब देगा। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने जोर देकर कहा कि देश अपनी क्षेत्रीय अखंडता के सामने आने वाले किसी भी खतरे का मजबूती से सामना करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्होंने क्षेत्र से सभी विदेशी ताकतों को तुरंत हटाने की मांग की है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने आगे यह भी चेतावनी दी है कि जो देश इन सैन्य अभियानों में अमेरिकी सेना की सहायता करेंगे, उन्हें भी इसके गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।