अमेरिका और ईरान में बढ़ा तनाव, ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने मांगी यूएन से मदद

बुधवार, 9 सितंबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी तेल टैंकरों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की और इसे सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया। ईरान ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन करार देते हुए यूएन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। यह पूरा मामला मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के एक सैन्य ऑपरेशन के बाद शुरू हुआ, जिसमें अमेरिका ने पांच ईरानी क्रूड ऑयल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया था। इनमें से चार टैंकर ओमान की खाड़ी में थे और एक टैंकर खाग द्वीप के पास मौजूद था, जिन्हें क्रू मेंबर द्वारा छोड़े जाने के बाद निशाना बनाया गया। ANI News की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ कहा कि अगर ईरान अमेरिकी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाना बंद नहीं करेगा, तो अमेरिका भी इसी तरह ईरानी टैंकरों को निशाना बनाता रहेगा। यह बयान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC द्वारा हाल ही में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलिस्टिक मिसाइल से किए गए हमलों के जवाब में आया है।
मिसाइल हमलों से मध्य पूर्व में गरमाया माहौल
इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में IRGC एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी Al-Azraq Air Base पर मिसाइलें दाग दीं। जॉर्डन के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि कुल 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं, जिनमें से 18 मिसाइलों को देश की एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि दो मिसाइलें खाली इलाकों में गिरीं जिससे किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। इसके अलावा, IRGC ने यह भी दावा किया कि उन्होंने फारस की खाड़ी में अमेरिका के दो युद्धपोतों और आठ अन्य तेल टैंकरों को भी सफल निशाना बनाया है। हालांकि, अमेरिकी सैन्य कमांड CENTCOM ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि ईरान के सभी प्रयास विफल साबित हुए और उनके हमलों का कोई असर नहीं पड़ा।
संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग
ईरान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव से अपील की है कि वे अमेरिका के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाएं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका खाड़ी देशों के समुद्री रास्तों पर नौवहन की नाकाबंदी कर रहा है और आर्थिक युद्ध लड़ रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सशस्त्र सेनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपने देश की सुरक्षा और आत्मरक्षा के अधिकार का पूरी तरह पालन करने के लिए तैयार हैं। इस बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से व्यापार या यात्रा करने वाले लोगों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है, क्योंकि इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति लगातार संवेदनशील बनी हुई है।