संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार तंत्र राजनीतिक रूप से प्रेरित है और पश्चिमी देशों का हथियार है ईरान
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और अमेरिका व इजरायल पर आरोप लगाए।

तेहरान: ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार तंत्र की कड़ी निंदा करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा कि यह तंत्र मूल रूप से यूनाइटेड किंगडम द्वारा थोपा गया एक उपाय है।
बग़ाई ने आरोप लगाया कि इस तंत्र का इस्तेमाल अमेरिका और इजरायल द्वारा की गई सैन्य आक्रामकता को छिपाने के लिए एक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह तंत्र वास्तव में इन देशों के सैन्य हमलों को सही ठहराने का काम करता है।
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ जिसे 28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया गया था। ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टर माई सातो ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों से ईरानी जनता की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
हालांकि, सातो ने अपनी रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि ईरानी सरकार मौजूदा संघर्ष का फायदा उठाकर घरेलू विरोध को दबा रही है। उन्होंने रिपोर्ट में गिरफ्तारियों और फांसी की घटनाओं में बढ़ोतरी का जिक्र किया है।
तेहरान ने हमेशा से विशेष रैपोर्टर के जनादेश को खारिज किया है और इसे पश्चिमी शक्तियों द्वारा राजनीतिक दबाव बनाने का जरिया बताया है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र का यह तंत्र अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, सैन्य खतरों और देश के खिलाफ की गई आक्रामकता से मानवाधिकारों पर पड़ने वाले असर को जानबूझकर नजरअंदाज करता है।