ईरान का बड़ा कदम, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले डेटा केबल्स पर अब तेहरान की कड़ी नजर.

Praggya Singh sabal19 September 20262 min read27 viewsWorld
ईरान का बड़ा कदम, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले डेटा केबल्स पर अब तेहरान की कड़ी नजर.

ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष समिति ने हाल ही में एक नया रणनीतिक फैसला लिया है। इस फैसले के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी डेटा केबल्स और ट्रांसमिशन उपकरणों के लिए तेहरान से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। 19 सितंबर 2026 को फार्स न्यूज एजेंसी और वाना न्यूज एजेंसी ने इस बात की जानकारी दी थी। सरकार का कहना है कि यह कदम देश के राष्ट्रीय हितों और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

संसदीय और कानूनी समितियों की समीक्षा

नेशनल सिक्योरिटी एंड फॉरेन पॉलिसी कमीशन के उप अध्यक्ष अब्बास मोघतादाई ने इस बात की पुष्टि की कि इस योजना के अनुच्छेद 10 की पूरी समीक्षा कर ली गई है। इस विशेष समिति में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, खुफिया मंत्रालय, रक्षा और सशस्त्र बल रसद मंत्रालय, राष्ट्रपति के कानूनी मामलों के कार्यालय, संसद के कानूनी मामलों के विभाग और संसद अनुसंधान केंद्र के प्रतिनिधि शामिल थे। यह नियम आने वाले रविवार को अंतिम मंजूरी के लिए नेशनल सिक्योरिटी एंड फॉरेन पॉलिसी कमीशन के सामने पेश किया जाएगा।

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इससे पहले मई 2026 में एक गवर्नेंस मॉडल का प्रस्ताव रखा गया था। इस मॉडल में विदेशी कंपनियों से परमिट लेने, लाइसेंसिंग और वार्षिक नवीनीकरण शुल्क वसूलने की बात कही गई थी। साथ ही केबल रखरखाव पर एकाधिकार हासिल करने का प्रयास भी किया जा रहा था। ईरान ने इसके पीछे 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के अनुच्छेद 34 को अपना कानूनी आधार बताया है और संबंधित समुद्र तल पर अपने अधिकार का दावा किया है।

वैश्विक कंपनियों और इंटरनेट सेवाओं पर असर

ईरान के इस नए फैसले का सीधा असर AAE-1, फाल्कन और गल्फ ब्रिज जैसे महत्वपूर्ण सबमरीन केबल सिस्टम पर पड़ सकता है। इससे गूगल, मेटा, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों का कामकाज भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि उद्योग के जानकारों के बीच इस मामले को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।

मई 2026 में टेलीजियोग्राफी के एलन मौल्डिन ने बताया था कि वैश्विक स्तर पर इंटरनेट सेवा बाधित होने का खतरा कम है, क्योंकि यूरोप और एशिया के बीच डेटा का आदान-प्रदान केवल होर्मुज के रास्ते पर निर्भर नहीं है। केंटिक के इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ डौग मैडोरी ने भी यह साफ किया था कि प्रभावित होने वाले कई केबल मिस्र के रास्ते से भी गुजरते हैं। इसके अलावा अमेरिकी विदेश विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान द्वारा आसानी से फीस वसूलने की क्षमता पर भी संदेह जताया है.

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की मिडिल ईस्ट लीड दीना एसफंदियारी ने इस पहल को तेहरान की एक रणनीतिक चाल बताया है। उनके अनुसार इसके जरिए ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ दिखाना चाहता है और दुनिया पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर लगातार चर्चा हो रही है कि आने वाले समय में तकनीक और इंटरनेट ट्रैफिक पर इसका क्या असर पड़ेगा।

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