Yemen Crisis: ईरान ने साफ कहा, नाकाबंदी और सैन्य गठबंधन से नहीं सुलझेगा यमन का संकट

यमन संकट को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर से काफी ज्यादा बढ़ गया है। 11 सितंबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय की तरफ से एक आधिकारिक बयान जारी किया गया जिसमें यह साफ तौर पर कहा गया कि यमन में चल रहे संकट का समाधान किसी भी तरह की नाकाबंदी या सैन्य गठबंधन बनाने से नहीं निकाला जा सकता है। ईरान ने इस बात पर जोर दिया कि लाल सागर और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए यमन की स्वतंत्रता, उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही यमन के आम लोगों के अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा करने की बात भी कही गई।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर हुई उच्च स्तरीय बातचीत
यह बयान ईरान के वरिष्ठ राजनयिक अब्बास अरागची और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर हुई एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के ठीक बाद सामने आया। इस दौरान ईरानी सरकार ने एक बार फिर से यमन पर लगी नाकाबंदी को तुरंत खत्म करने की अपनी मांग को दोहराया। इसके साथ ही तय किए गए रोडमैप के आधार पर शांति वार्ताओं को दोबारा शुरू करने में मदद करने की अपनी इच्छा भी जाहिर की।
मोखा शहर पर कब्जे के बाद तनाव बढ़ा
क्षेत्र में यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में देखने को मिल रही है जब वहां का संघर्ष काफी ज्यादा खतरनाक मोड़ ले चुका है। 10 सितंबर 2026 को हुथी विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम बंदरगाह शहर मोखा पर अपना कब्जा जमा लिया। यह इलाका बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से 50 मील यानी करीब 80 किलोमीटर से भी कम दूरी पर मौजूद है। आपको बता दें कि यह जलमार्ग वैश्विक शिपिंग का 12 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, इसलिए यहां तनाव का बढ़ना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। साल 2022 में हुआ संघर्ष विराम समझौता जुलाई 2026 में टूट गया था, जिसके बाद से क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।
एक तरफ जहां हुथी प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम का यह कहना है कि उनकी तरफ से उठाए जा रहे कदम पूरी तरह से बाहरी हमलों के खिलाफ बचाव के लिए हैं, वहीं दूसरी तरफ इस समूह ने सऊदी अरब के तेल ठिकानों और लाल सागर में जहाजों पर अपने हमलों को तेज कर दिया है। इन तमाम घटनाओं के बीच अमेरिकी प्रशासन ने भी यह जानकारी दी है कि वह स्थिरता बहाल करने के लिए सऊदी अरब और यमन सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ ईरान पर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि वह हुथियों की मदद कर रहा है और हाल ही में तटीय इलाकों में हुए हमलों के पीछे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की सलाह शामिल थी, हालांकि ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन सभी आरोपों को हमेशा से खारिज किया है।