संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने परमाणु सुरक्षा दायित्वों का बचाव किया और अमेरिका व इजरायल पर सैन्य हमले करने का आरोप लगाया
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि उसने परमाणु सुरक्षा दायित्व नहीं छोड़े हैं, लेकिन अमेरिकी और इजरायली हमलों ने हालात बदल दिए हैं।

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में ईरान के डिप्टी यूएन दूत गुलामहोसिन दरजी ने साफ किया है कि ईरान ने अपने परमाणु सुरक्षा दायित्वों को न तो छोड़ा है और न ही औपचारिक रूप से निलंबित किया है। उन्होंने कहा कि 2025 और 2026 में परमाणु केंद्रों को निशाना बनाकर अमेरिका और इजरायल ने जो सैन्य हमले किए, उससे सुरक्षा हालात पूरी तरह बदल गए हैं।
दरजी ने दावा किया कि अब बिना नई गारंटियों के निरीक्षण करना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर पाखंड का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने सैन्य हमलों को रोकने और ईरान के खिलाफ जारी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की अपील की है।
वियना में ईरान के स्थायी मिशन ने IAEA क़ानून की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की आलोचना की। मिशन ने एजेंसी पर आरोप लगाया कि उसने सुरक्षित सुविधाओं पर हुए हमलों की निंदा नहीं की और वह दोहरे मापदंड अपना रही है।
परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के अनुच्छेद IV का हवाला देते हुए दरजी ने कहा कि ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी देश के पास इस संधि को एकतरफा बदलने या राजनीतिक वीटो लगाने का अधिकार नहीं है।
दूसरी ओर, IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने 23 अक्टूबर को बताया कि एजेंसी ने ईरान की परमाणु गतिविधियों के सत्यापन के लिए अधिकांश तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि एक स्थिर समाधान के लिए स्वतंत्र सत्यापन के समर्थन वाली राजनयिक सहमति जरूरी है।
अमेरिका ने इस बीच दबाव जारी रखा है। यूएन में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने पुष्टि की कि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों को बरकरार रखेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के मिसाइल, ड्रोन और परमाणु बुनियादी ढांचे पर नए सैन्य हमलों पर विचार कर रहे हैं।