परमाणु प्रस्ताव की समीक्षा के दूसरे चरण में पहुंचा मामला, ईरान ने कतर भेजा प्रतिनिधिमंडल
ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए कतर में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजा है। जानें क्या है अमेरिका और ईरान के बीच विवाद।

दोहा: ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 31 अक्टूबर, 2026 को पुष्टि की कि ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल कतर की राजधानी दोहा पहुंच चुका है। यह दौरा परमाणु प्रस्तावों की समीक्षा के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है।
इससे पहले 30 अक्टूबर को तेहरान में ईरानी अधिकारियों और कतरी मध्यस्थों के बीच 12 घंटे से ज्यादा समय तक गहन चर्चा हुई थी। अरागची ने बताया कि तेहरान अब मध्यस्थों द्वारा पेश किए गए प्रस्तावों की समीक्षा के दूसरे चरण में है। इन कोशिशों का मुख्य उद्देश्य 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले क्षेत्रीय तनाव को रोकना है।
खबरों के मुताबिक, कतर के अधिकारी इस मामले में व्हाइट हाउस के साथ तालमेल बिठा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में चीन और रूस की भूमिका गारंटी देने वाले देशों के रूप में हो सकती है। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई को एक पत्र भेजकर फिर से बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे अरागची ने एक सकारात्मक कदम बताया है।
बातचीत के बीच दोनों देशों की शर्तें अलग-अलग हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि सीधी बातचीत शुरू करने से पहले ईरान को परमाणु रियायतें देनी होंगी। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी जमी हुई धनराशि को वापस करने, नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और तेल बेचने की अनुमति देने की मांग रखी है।
इसी बीच, ईरान की संसदीय समिति के कुछ सदस्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाली संधि (NPT) से हटने पर बहस कर रहे हैं। हालांकि, विदेश मंत्री अरागची ने दोहराया कि ईरान शांतिपूर्ण यूरेनियम संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है और देश के सुरक्षा सिद्धांत में सामूहिक विनाश के हथियारों की कोई जगह नहीं है।
अरागची ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी भविष्य के हमले का जवाब ईरान और अधिक शक्ति के साथ देगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान अब अपनी रक्षा के संबंध में पिछली रेड लाइन्स का सम्मान नहीं करेगा।