अमेरिका से बातचीत से पहले ईरान की बड़ी शर्त, रखी गई 7 बातें और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज बंद.

अमेरिका के साथ फिर से बातचीत शुरू करने से पहले ईरान ने अपनी तरफ से कड़ी शर्तें रख दी हैं और साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई बात नहीं होगी। ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को यह जानकारी दी कि देश के संदेश और शर्तें कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक पहुंचा दी गई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत की मेज पर लौटने से पहले अमेरिका को ईरान के अधिकारों को मानना होगा और अपने पुराने कमिटमेंट्स को पूरा करना होगा।
ईरान की सात मुख्य शर्तें और सैन्य तैयारी
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मेजर जनरल Mohsen Rezaei ने इस बात की पुष्टि की कि वाशिंगटन को औपचारिक रूप से सात शर्तें भेज दी गई हैं। इन मुख्य मांगों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से बंद करना, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, नौसेना की नाकाबंदी खत्म करना, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाना, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना और ईरान के जमे हुए फंड को रिहा करना शामिल है। रेजाई ने कहा कि तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहा है और अगर मांगें ठुकरा दी जाती हैं तो देश एक निर्णायक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।
मिसाइल की रफ्तार और क्षेत्रीय तनाव
ईरानी सेना ने अपनी ताकत दिखाते हुए हाइपरसोनिक मिसाइलों की गति को बढ़ाकर Mach 10 कर लिया है और हिंद महासागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने की खुली चेतावनी भी दी है। गालिबफ ने देश की कूटनीतिक नीति को समझाते हुए कहा कि ईरान को अभी लड़ने और बात करने दोनों की जरूरत है, जिससे सैन्य दबाव बनाकर कूटनीतिक फायदे हासिल किए जा सकें। इसके अलावा खातम अल-अनबिया सेंट्रल मिलिट्री कमांड ने भी कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि अमेरिका की तरफ से कोई भी हमला किया जाता है, तो उसके बेस और हितों पर लगातार हमले किए जाएंगे।
अमेरिका का अगला कदम और मध्य पूर्व में सुरक्षा अलर्ट
इन बढ़ते तनावों के बीच रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका एक बार फिर से सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप ने कैंप डेविड की अपनी यात्रा को बीच में ही रद्द कर दिया है। हालात को गंभीर देखते हुए मध्य पूर्व में रह रहे अमेरिकी नागरिकों के लिए एक नया सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। क्षेत्रीय देशों को भी यह चेतावनी दी गई है कि जो देश अमेरिकी आक्रामकता का समर्थन करेंगे, उन्हें संघर्ष में शामिल माना जाएगा।