बातचीत के लिए ईरान की शर्त, अमेरिका से कहा- पहले हटाओ नौसैनिक नाकाबंदी
ईरान ने बातचीत शुरू करने के लिए अमेरिका से नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और फ्रीज फंड जारी करने की मांग की है।

तेहरान: ईरान ने अमेरिका के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के लिए एक कड़ी शर्त रखी है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता, वह बातचीत की मेज पर नहीं लौटेगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी बातचीत का रास्ता नहीं छोड़ा है। उन्होंने अमेरिका पर एकतरफा मांगें थोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि नाकाबंदी हटाने के साथ-साथ फ्रीज किए गए फंड जारी करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में ढील देना भी जरूरी है।
कूटनीतिक हलचल तब तेज हुई जब 30 अक्टूबर 2026 को तेहरान में ईरानी अधिकारियों और कतरी मध्यस्थों के बीच 12 घंटे तक चर्चा चली। यह बातचीत 31 अक्टूबर 2026 को दोहा में जारी रहने वाली है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में सकारात्मक प्रगति की बात कही गई है, लेकिन बातचीत फिलहाल रुकी हुई है क्योंकि अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले परमाणु रियायतें दे।
मध्यस्थ अब ईरान पर दबाव बना रहे हैं कि वह प्रतिबंधों में राहत के बदले संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को अपने परमाणु स्थलों पर आने दे। गौरतलब है कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के विफल होने के बाद 14 जुलाई 2026 को अमेरिका ने फिर से नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी थी, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की 31 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, नाकाबंदी, कड़े प्रतिबंधों और जमीनी निर्यात रास्तों में रुकावट ने ईरानी व्यापार को तबाह कर दिया है। 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' अभियान का नेतृत्व कर रहे ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाकाबंदी के अपने फैसले पर कोई बदलाव नहीं करेंगे।
बेसेंट ने बताया कि 25 अगस्त 2026 के बाद से ईरान जहाजों पर तेल लोड करने में सफल नहीं रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि मार्च 2027 तक ईरानी अर्थव्यवस्था 25 प्रतिशत से अधिक सिकुड़ सकती है, जिससे पेट्रोल और हीटिंग फ्यूल की भारी किल्लत हो सकती है।
इन तनावों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 31 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि ईरान बातचीत चाहता है और यह संघर्ष जल्द ही खत्म होने वाला है। दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने परमाणु कार्यक्रम पर सीधी बातचीत के लिए सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रज़ाई को पत्र भेजा है, जिस पर तेहरान ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में छह वाणिज्यिक जहाजों को समुद्री बारूदी सुरंगों से नुकसान पहुंचा है, जबकि अमेरिका का कहना है कि शिपिंग लेन सुरक्षित और खुले हैं।