ईरान का अमेरिका को कड़ा संदेश, डिप्टी स्पीकर बोले- अब घुटने टेकेंगे अमेरिकी
ईरान के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने कहा कि अमेरिकी दबाव काम नहीं करेगा और अब परमाणु बातचीत की खिड़की बंद हो चुकी है।

तेहरान: ईरानी संसद के प्रथम डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने रविवार, 1 नवंबर 2026 को एक संसदीय सत्र के दौरान कहा कि ईरान के अटूट लचीलेपन और उसकी सेना की ताकत ने अमेरिका को वास्तविकता के कठोर धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है।
निकजाद ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के पास अब इस्लामिक रिपब्लिक की ताकत को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा संघर्ष में ईरानी जनता नहीं, बल्कि अमेरिकी अंततः आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होंगे।
परमाणु बातचीत के मुद्दे पर बोलते हुए डिप्टी स्पीकर ने साफ किया कि चर्चाओं की खिड़की अब प्रभावी रूप से बंद हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दबावों के बीच ईरान की बातचीत में शामिल होने की कोई मंशा नहीं है।
निकजाद के मुताबिक, विरोधियों के लिए सबसे समझदारी भरा रास्ता यही होगा कि वे मौजूदा हकीकत को स्वीकार करें। उन्होंने मांग की कि इस्लामिक रिपब्लिक द्वारा निर्धारित सात शर्तों को बिना किसी शर्त के लागू किया जाए।
सैन्य चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि अगर ईरान के खिलाफ पुरानी सैन्य गलतियों को दोहराया गया, तो इसका जवाब तत्काल और प्रभावी होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रतिक्रिया के लिए कोई भौगोलिक सीमा नहीं होगी।
इन कड़े बयानों के बीच कतर में मध्यस्थ अभी भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि यदि संबंधित पक्ष कुछ शर्तों को पूरा करते हैं, तो एक नए प्रस्ताव के जरिए दो दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोला जा सकता है।