इस्लामाबाद समझौते को फिर से लागू करने के लिए ईरान की कूटनीतिक पहल तेज़.

Praggya Singh sabal19 September 20262 min read20 viewsWorld
इस्लामाबाद समझौते को फिर से लागू करने के लिए ईरान की कूटनीतिक पहल तेज़.

ईरान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अली ज़ेयनीवंद ने 19 सितंबर 2026 को ऐलान किया कि इस्लामाबाद समझौते को दोबारा शुरू करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत और कोशिशें तेजी से चल रही हैं। इस समझौते को बचाने के लिए कई देशों की मदद ली जा रही है ताकि क्षेत्र में शांति लौट सके और तनाव कम हो सके।

समझौते को लेकर अमेरिका से अपील

प्रवक्ता अली ज़ेयनीवंद ने समझौते के दूसरे पक्ष यानी अमेरिका से साफ तौर पर कहा है कि वह इस डील के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करे। आपको बता दें कि इस्लामाबाद समझौता 18 जून 2026 को साइन किया गया था और यह 19 जून 2026 से लागू हुआ था। इस 14 सूत्रीय फ्रेमवर्क का मुख्य मकसद सैन्य हमलों को रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य को 60 दिनों के लिए बिना टोल शिपिंग के खोलना, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौकांसिक नाकाबंदी को हटाना और युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाना था। इस समझौते को ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंजूरी दी थी और सर्वोच्च नेता सैय्यद मोजतबा खामनेई ने इसका समर्थन किया था। लेकिन 8 जुलाई 2026 को उस समय तनाव फिर से बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी क्षेत्र पर अमेरिकी हमलों के बाद युद्धविराम को स्थगित करने की घोषणा कर दी थी।

कूटनीतिक बातचीत और मध्यस्थता

इस समझौते को फिर से पटरी पर लाने के लिए पिछले कुछ दिनों में उच्च स्तर की बातचीत तेज हो गई है। 16 सितंबर 2026 को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची के साथ बातचीत के दौरान दोनों देशों से अपनी बातचीत की व्यवस्था को फिर से शुरू करने का आग्रह किया था। मंत्री अरागची ने फिर से यह बात दोहराई कि ईरान अभी भी इस समझौते को वैध मानता है और उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में ओमान के साथ एक समझौते का भी जिक्र किया। इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने 29 अगस्त 2026 को इस बात पर जोर दिया था कि बातचीत के जरिए इस समझौते को फिर से लागू किया जाना चाहिए। पाकिस्तान, जिसने इस डील में मध्यस्थता की थी, वह मौजूदा बातचीत में भी अपनी मुख्य भूमिका निभा रहा है। 18 सितंबर 2026 को पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने इस दस्तावेज को तनाव कम करने के लिए एकमात्र वास्तविक रास्ता बताया। इसके अलावा कतर, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र ने भी इस मामले में सहयोग किया है। प्रवक्ता ज़ेयनीवंद ने बताया कि ईरान की यह कूटनीतिक कोशिश शंघाई और ब्रिक्स सम्मेलनों में देश की व्यापक भागीदारी के अनुरूप भी है।

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