ईरान की सुरक्षा बलों ने दक्षिण-पूर्व इलाके में दो आतंकी टीमों को किया नाकाम
ईरान की IRGC ने दक्षिण-पूर्व इलाके में दो आतंकी टीमों को खत्म किया है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा हुआ है।

तेहरान: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दक्षिण-पूर्वी ईरान में सक्रिय दो आतंकी टीमों को खत्म करने का दावा किया है। IRNA न्यूज एजेंसी के जरिए जारी आधिकारिक बयान में इस सुरक्षा अभियान की जानकारी दी गई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री अस्थिरता बढ़ गई है।
इसी दिन ईरान की नौसेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में एक तेल टैंकर ने समुद्री सुरंगों से टक्कर मार ली, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई। ईरानी अधिकारियों ने इस जहाज को नियमों का उल्लंघन करने वाला बताया है। उनका आरोप है कि जहाज ने प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र में बिना अनुमति घुसने के लिए अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर रखा था।
ईरानी सेना का कहना है कि बिना समन्वय के चलने वाले जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बंद और असुरक्षित है। सेना ने पहले ही चेतावनी दी थी कि पहचान प्रणाली बंद रखने वाले जहाजों को सख्त जवाब दिया जाएगा। 28 फरवरी 2026 को मध्य पूर्व युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है और सुरक्षा कारणों से आवाजाही को प्रतिबंधित कर रहा है।
सितंबर 2026 में ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रजाई ने एक नए प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र लागू करने की घोषणा की थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह जलडमरूमध्य पूरी तरह से ईरानी सशस्त्र बलों के नियंत्रण में है। इसी बीच, पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने बताया कि दक्षिण कोरियाई शिपिंग कंपनी सिनोकोर के सभी जहाजों पर 1 नवंबर 2026 से कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम पिछले नेविगेशन उल्लंघनों के कारण उठाया गया है।
क्षेत्र में समुद्री माहौल काफी तनावपूर्ण है और अक्टूबर 2026 वाणिज्यिक शिपिंग के लिए सबसे घातक महीना रहा है, जिसमें 28 हमलों की पुष्टि हुई है। अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी नौसेना की वापसी के दावों को खारिज कर दिया है, हालांकि अमेरिका अब भी ईरान से जुड़े जहाजों की नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखे हुए है।
संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत पारगमन मार्ग की गारंटी दी गई है, लेकिन ईरान ने इस संधि की पुष्टि नहीं की है। इसी वजह से इस क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर विवाद जारी है।